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केवल सिर पर टोपी लगा लेने से कोई मुसलमान नहीं बन जाता..!

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केवल सिर पर टोपी लगा लेने से कोई मुसलमान नहीं बन जाता..!

नाजनीन  अहमद : कई बार जैसे हम दिखते हैं, जैसी जिंदगी जीते हैं और जिन नियमों और नैतिकताओं की बातें करते हैं, वे हममे से कइयों के आसपास दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती। फिर इसमें भी कइयों का क्‍या कहे, इस तरह से तो पूरा समाज दिखाई देने लगा है। यकीनन जैसा हम सोचे और वैसी जिंदगी और मर्यादाओं का पालन करना सीख जाए, तो पूरे समाज में अमन और शांति आ जाए। लेकिन ऐसा होता नहीं है।

अमूमन देखने में यह आता है कि हम सब दोहरी जिंदगी का शिकार होते हैं। इसे मुंह में “राम बगल में छुरी” वाले मामले के तौर पर देखा जाए तो बेहतर होगा। वैसे दोगले और दोहरेपन से तो पूरा देश और समाज यहां तक की दुनिया जूझ रही है।

सियासत कहती कुछ है और करती कुछ है, आदमी करता कुछ है और होता कुछ है, जाति, संप्रदाय, और यहां तक समुदाय भी इन्‍हीं दोहरे मापदंडों के चलते सिमट गए हैं और एक तरह से अपने-अपने स्‍वार्थों में उलझे हैं। यही नहीं धर्म का भी यही हाल है। दुनिया के सारे धर्म अमन, भाईचारे और शांति की बात करते हैं, लेकिन आप देखेंगे की दुनिया में इस समय धर्म का ही झगड़ा सबसे बड़ा है।

आपके सामने तस्‍वीर कुछ दूसरी ही है। हर व्‍यक्‍ति अपने धर्म को श्रेष्‍ठ कह रहा है जबकि ये और बात है कि दुनिया के सारे धर्मों में यही मूल बात सामने आती है कि व्‍यक्‍ति को कैसे श्रेष्‍ठ बनाया जाए। कैसे आदमी को आदमी से प्‍यार, मोहब्‍बत अमन और भाईचारे के साथ रहना चाहिए।  लेकिन होता कुछ दूसरा ही है धर्म आदमी को जो सिखाना चाहता है, आदमी उससे कुछ दूसरा ही सीखना चाहता है।

अब जरा कल के ही एक वाकये को लें। कल शाम मैं मम्मी के साथ पास की ही एक दूकान से घर का राशन लेने गई थी, तभी देखा दो लड़कों में जोरदार लड़ाई हो रही है। हालांकि मुझे नहीं पता  था कि लड़ाई हो क्यों रही है? या लड़ाई के पीछे वजह क्या है? पहले तो वहां खड़े सभी लोगों ने उन दोनों की बातों को नजर अंदाज किया, लेकिन जब लड़ाई आवाजों के जरिये जंग में बदलने लगी, तो लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। उस भीड़ में मैं भी खड़ी थी, जब आगे बढ़कर देखा, तो दो लड़के थे, दोनों के ही मुंह में गुटखा था, जो एक दूसरे को गाली-गलौज करने दौरान मुंह से ऐसे ही बाहर आ रहा था, जैसे उनके दिल से एक दूसरे के लिए नफरत बाहर आ रही थी।

उन लड़कों में से एक सादे  कमीज और पैंट में था, तो दूसरा कुर्ते पजामे में और सिर पर सफेद रंग की टोपी भी लगा रखी थी। दिखने में लग रहा था, जैसे या तो वो नमाज पढ़ने जा रहे हैं, या  नमाज पढ़कर आ रहे हैं। दोनों ही किसी बात को लेकर बहुत जोर से लड़ रहे थे।

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