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8 साल बाद नेशनल हेराल्ड एक बार फिर से प्रकाशित होने जा रहा है. नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन 1938 में एजेएल यानि कि असोसिएट जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी प्रकशित करती थी. इस के प्रकाशन के कुछ दिनों के बाद ही यह कंपनी कई तरह के विवादों में घिरने लगी थी. एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) ने अपने स्वरू प में बदलाव करते हुए गैर व्यावसायिक कंपनी बनने का फैसला किया है. यह निर्णय गुरुवार को हुई कंपनी के शेयर धारकों की विशेष आमसभा में लिया गया है. हालाँकि पत्रिका के प्रकाशन की तारीख अब तक तय नहीं हुई है. नए फैसले के अनुसार कंपनी का मकसद अब वित्तीय लाभ कमाना नहीं होगा. capture

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अब तक तीन बार बंद हो चूका है नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन.

  • पहली बार हेराल्‍ड को वर्ष 1942 से लेकर 1945 तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया. क्योंकि अगस्‍त 1942 के बाद ब्रिटिशों ने इंडिया प्रेस पर हमला कर उसे पुरे तरीके से अपने कब्जे में ले लिया था. इसके बाद 1945 के अंतिम महीनों में एक बार फिर से नेशनल हेराल्‍ड की शुरुआत की गई.
  • 1977 में अखबार को एक बार फिर से बंद करने की नौबत तब आ गई जब इंदिरा गाँधी को लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. यह अवधि नेशनल हेराल्ड के किये अब तक की सबसे बुरा वक़्त माना जाता है. ऐसा इस लिए कहा जाता है कि उस वक़्त अखबार पुरे तरीके से कांग्रेस के अधीन हो कर खबरों को प्रकाशित करती थी.
  • 1998 में हेराल्ड के लखनऊ संस्‍करण को बंद कर दिया गया लेकिन सिर्फ दिल्‍ली संस्‍करण बाजार में आता रहा. बतादें कि 1 अप्रैल, वर्ष 2008 को नेशनल हेराल्‍ड के बोर्ड सदस्‍यों के ओर से घोषणा के बाद हेराल्‍ड के दिल्‍ली संस्‍करण को भी बंद कर दिया गया. कंपनी के ओर से यह दलील दी गई कि प्रिंट तकनीकी और कंप्‍यूटर तकनीकी में सुधार न होने के कारण इसे बंद किया गया. जिस वक़्त नेशनल हेराल्‍ड को जब बंद किया गया तो उस समय उसके एडिटर इन चीफ टीवी वेंकेटाचल्‍लम थे.

अगले पेज पर पढ़ें किन शर्तों पर शुरू होने जा रहा है अखबार का पुनः प्रकशन…

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