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mann ki baat

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फिर रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ कर रहे हैं। मोदी ने गर्मी और सूखे पर बात की। उन्होंने उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग और कई राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा की। मोदी ने कहा कि मैंने सूखे पर प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अलग-अलग बात की।

प्रधानमंत्री के मन की बात

  • मैं आकाशवाणी का आभारी हूं कि उन्होंने इस ‘मन की बात’ को शाम को 8.00 बजे प्रादेशिक भाषाओं में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया है। खुशी है,जो लोग मुझे सुनते हैं,बाद में पत्र,टेलीफोन, MyGov website, Narendra Modi App के द्वारा अपनी भावनाओं को मेरे तक पहुंचाते हैं।
  • बहुत सी आपकी बातें मुझे सरकार के काम में मदद करती हैं। जनहित की दृष्टि से सरकार कितनी सक्रिय होनी चाहिए,, इन बातों के लिए आपके साथ का मेरा ये संवाद, ये नाता बहुत काम आता है। इधर गर्मी बहुत बढ़ गई है। शायद मानसून एक सप्ताह विलंब कर जाएगा,  तो चिंता और बढ़ गई। जंगल कम होते गए, पेड़ कटते गए, मानवजाति ने ही प्रकृति का विनाश करके स्वयं के विनाश का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
  • 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस है, इस बार संयुक्त राष्ट्र ने जीरो टॉलरेंस फॉर इलीगल वाइल्डलाइफ ट्रेड विषय रखा है। पिछले दिनों उत्तराखण्ड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, हिमालय की गोद में, जंगलों में आग लगी। आग का मूल कारण ये ही था कि सूखे पत्ते और कहीं थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए, तो बहुत बड़ी आग में फैल जाती है। इसलिए जंगलों को बचाना, पानी को बचाना ये हम सबका दायित्व बन जाता है।
  • 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सूखे की स्थिति पर विस्तार से बातचीत करने का अवसर मिला, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा। मैंने हर राज्य के साथ अलग मीटिंग की। एक-एक राज्य के सीएम के साथ क़रीब-क़रीब दो-दो, ढाई-ढाई घंटे बिताए। राज्यों को क्या कहना है। आम तौर पर सरकार में, भारत सरकार से कितने पैसे गए और कितनों का खर्च हुआ, इससे ज्यादा बारीकी से बात नहीं होती है। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कई राज्यों ने बहुत ही उत्तम प्रयास किए हैं। इस समस्या की, लम्बी अवधि की परिस्थिति से, निपटने के लिए परमानेंट सल्यूशन क्या हों।
  • मैंने तो नीति आयोग को कहा है कि जो बेस्ट प्रैक्टिस हैं, उनको सभी राज्यों में कैसे लिया जाए। ये एक प्रकार से मेरे लिए वो लर्निंग अनुभव भी था। कुछ राज्यों ने,  आन्ध्र ने, गुजरात ने तकनीकी का भरपूर उपयोग किया है। मैं चाहूंगा कि आगे नीति आयोग के द्वारा राज्यों के जो विशेष सफल प्रयास हैं, उसको हम और राज्यों में भी पहुंचाएं। ऐसी समस्याओं के समाधान में जन-भागीदारी एक बहुत बड़ा सफलता का आधार होती है। परफेक्ट प्लानिंग, टेक्नोलॉजी, समय-सीमा में व्यवस्थाओं को पूर्ण करने का प्रयास अच्छे परिणाम दे सकता है।
  • पानी परमात्मा का प्रसाद है। एक बूंद भी बर्बाद हो, तो हमें पीड़ा होनी चाहिए। खुशी की बात कई राज्यों में हमारे गन्ने के किसान भी माइक्रो इर्रिगेशन, ड्रिप इर्रिगेशन, स्प्रिंकलर का उपयोग कर रहे हैं।

आगे पढ़े – सरकारी योजनाओं पर बात

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