loading...

नाड़ी का शुद्ध और मजबूत होना जरूरी है। वायु प्रदूषण, शराब का सेवन, अन्य किसी प्रकार का नशा, अनियमित खान-पान, क्रोध, अनिंद्रा, तनाव और अत्यधिक काम और संभोग के चलते नाड़ियां कमजोर हो जाती हैnadis

loading...

नाड़ियों के कमजोर होने से शरीर भारी रहने लगता है। व्यक्ति कफ, पित्त, आदि की शिकायत से या आलस्य से ग्रस्त हो जाता है। किसी भी कार्य के प्रति अरुचि बढ़ जाती है। ऐसा व्यक्ति संभोग के क्षणों में भी स्वयं को अक्षम पाता है। नाड़ियों के कमजोर रहने से व्यक्ति अन्य कई गंभीर रोगों की चपेट में भी आ सकता है।

हमारे शरीर में बहत्तर हजार से ज्यादा नाड़ियां हैं और सभी का मूल उदगम स्त्रोत नाभि स्थान है। उक्त नाड़ियों में भी दस नाड़ियां मुख्य हैं- 1.इड़ा (नाभि से बाईं नासिका), 2.पिंगला (नाभि से दाईं नासिका), 3.सुषुम्ना (नाभि से मध्य में), 4.शंखिनी (नाभि से गुदा), 5.कृकल (नाभि से लिंग तक), 6.पूषा (नाभि से दायां कान), 7.जसनी (नाभि से बाया कान), 8.गंधारी (नाभि से बाईं आंख), 9.हस्तिनी (नाभि से दाईं आंख), 10.लम्बिका (नाभि से जीभ)।

नाड़ियों को स्वस्थ रखने का तरीका : सामान्यत: नाड़ियां दो तरीके से स्वस्थ्य, मजबूत और हष्ट-पुष्ट बनी रहती है- 1.यौगिक आहार और 2.प्राणायाम।

यौगिक आहार : यौगिक आहार में गेहूं, चावल, जौ जैसे सुंदर अन्न। दूध, घी, खाण्ड, मक्खन, मिसरी, मधु जैसे फल-दूध। जीवन्ती, बथुआ, चौलाई, मेघनाद एवं पुनर्नवा जैसे पांच प्रकार के शाक। मूंग, हरा चना आदि। फल और फलों का ज्यूस ज्यादा लाभदायक है।

प्राणायाम : प्राणायाम की शुरुआत अनुलोम-विलोम से करें इसमें कुंभक की अवधि कुछ हद तक बढ़ाते जाएं। फिर कपालभाती और भस्त्रिका का अभ्यास मौसम और शारीरिक स्थिति अनुसार करें।

नाड़ी शुद्धि के लाभ : स्वस्थ और मजबूत नाड़ियां मजबूत शरीर और लम्बी उम्र की पहचान है। इससे सदा स्फूर्ति और जोश कायम रहता है। मजबूत नाड़ियों में रक्त संचार जब सुचारू रूप से चलता है तो रक्त संबंधी किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता। हृदय और फेंफड़ा मजबूत बना रहता है।

श्वास नलिकाओं से भरपूर वायु के आवागमन से दिमाग और पेट की गर्मी छंटकर दोनों स्वस्थ बने रहते हैं। पाचन क्रिया सही चलती है। संभोग क्रिया में भी लाभ मिलता है। शरीर व चेहरे की क्रांति बढ़ जाती है। तनाव और थकान से मुक्ति मिल जाती है।

CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें