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नाजनीन  अहमद
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दस साल की मुस्कान अपने पड़ोस की आपा के साथ बैठकर धागे में मोतियाँ पिरो रही हैं. इसलिए ताकि घर के ख़र्च में अब्बू का हाथ बंटा सके. मुस्कान स्कूल नहीं जाती हैं, बल्कि यहीं की एक मस्जिद में पढ़ने जा रही हैं. गाँव छोड़े उसे अब तीन साल बीत गए हैं. मुस्कान के हालात हमेशा ऐसे नहीं थे.

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