जानिये क्या खास हैं इस इंसान में, जो प्रधानमंत्री भी सब काम छोड़ कर कोंयमबटृर पहुंच गये !

अब तक ग्रीन हैंड्स परियोजना के अंतर्गत तमिलनाडु और पुदुच्चेरी में 1800 से अधिक समुदायों में, 20 लाख से अधिक लोगों द्वारा 82 लाख पौधे के रोपण का आयोजन किया है। कोयंबटूर के जिस परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 112 फिट ऊंची शिव प्रतिमा का अनावरण उसी परिसर में ध्यानलिंग योग मंदिर भी प्रतिष्ठित है।

बताया जाता है कि 1999 में सद्गुरु द्वारा प्रतिष्ठित ध्यान लिंग अपनी तरह का पहला लिंग है जिसकी प्रतिष्ठता पूरी हुई है। 13 फीट 9 इंच की ऊँचाई वाला यह ध्यानलिंग विश्व का सबसे बड़ा पारा-आधारित जीवित लिंग है।

आपको बता दें कि यह किसी खास संप्रदाय या मत से संबंध नहीं रखता, ना ही यहाँ पर किसी विधि-विधान, प्रार्थना या पूजा की जरूरत होती है। जो लोग ध्यान के अनुभव से वंचित रहे हैं, वे भी ध्यानलिंग मंदिर में सिर्फ कुछ मिनट तक मौन बैठकर घ्यान की गहरी अवस्था का अनुभव कर सकते हैं।

आपको शायद मालूम नहीं हो कि इसके प्रवेश द्वार पर सर्व-धर्म स्तंभ है, जिसमें हिन्दू, इस्लाम, ईसाई, जैन, बौध, सिक्ख, ताओ, पारसी, यहूदी और शिन्तो धर्म के प्रतीक अंकित हैं, यह धार्मिक मतभेदों से ऊपर उठकर पूरी मानवता को आमंत्रित करता है।

इन दिनों विदेशों के साथ साथ भारत में भी जग्गी सद्गुरु वासुदेव के मानने वालों लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।