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नीलगाय

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नई दिल्ली – आखिरकार मोदी सरकार ने इस गाय के शिकार करने की इजाजत दे ही दी। इसके बाद किसानों को काफी राहत मिल रही है। यह जानवर महज इसलिए बच रहा था, क्योंकि उसके नाम के पीछे गाय शब्द जुड़ा हुआ है। किसानों ने गाय शब्द के कारण इसे न मारने योग्य मान लिया था, लेकिन इसके कहर को देखते हुए मोदी सरकार को इसके शिकार की अनुमति कुछ राज्यों में देनी ही पड़ी।

 

किसानों की नंबर वन दुश्मन है ये गाय – हम बात कर रहे हैं नीलगाय की। किसानों की नंबर एक दुश्मन इस जानवर ने बिहार, यूपी, मध्यप्रदेश व उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में उनका जीना दुश्वार कर दिया है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल ये नीलगाय कम से कम 40-50 करोड़ की फसलों का नुकसान कर देती है। कई किसान इसको मारने के पक्ष में थे, लेकिन केंद्र के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-3 से हटाकर अनुसूची-5 में डाला तो इसके शिकार की अनुमति मिल गई। इसे फसलों को नुकसान पहुंचाने की श्रेणी में डाल दिया गया।

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