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नई दिल्ली – देश में दूध उत्पादन और जीडीपी में इसका योगदान बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी में इजाफे के लिए मोदी सरकार अब गायों की संख्या बढ़ाने पर फोकस करेगी। इसके लिए सरकार दो अमेरिकी कंपनियों एबीएस जीनस और सेक्सिंग टेक्नॉलजीज से बातचीत कर रही है। ये दोनों अमेरिकी कंपनियां दुनिया की उन चुनिंदा फर्मों में शामिल हैं, जिनके पास सेक्स सॉर्टेड सीमेन की टेक्नॉलजी है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि असिस्टेड रीप्रॉडक्शन के जरिए केवल गायों का ही जन्म हो। इस तरह बछड़ों का जन्म होने की गुंजाइश नहीं रहती है। शॉर्ट टर्म में केंद्र सरकार इन कंपनियों के साथ गठजोड़ करेगी, जो मुफ्त में अपने इक्विपमेंट और टेक्निशियंस मुहैया करा सकती हैं।

इसके अलावा डिपार्टमेंट ऑफ ऐनिमल हसबैंड्री, डेयरी ऐंड फिशिंग ने पिछले हफ्ते इंडियन काउंसिल ऑफ ऐग्रिकल्चर रिसर्च (ICAR) से अगले दो साल के भीतर भारत की अपनी सेक्स-सॉर्टिड टेक्नॉलॉजी तैयार करने के लिए कहा है। सरकार का मकसद साल 2019 तक हर साल 60 लाख ‘जेनेटिकली इंप्रूव्ड’ गायें पैदा करना है ताकि डेयरी किसानों के लिए मिल्क प्रॉडक्शन को ज्यादा लाभकारी बनाया जा सके।

दो सीनियर गवर्नमेंट ऑफिसर्स ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि इस तकनीक के जरिए पहली बछिया (गाय का बच्चा) अगले साल अप्रैल तक पैदा हो सकती है क्योंकि अगले महीने कैबिनेट नोट को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस स्कीम के अगस्त में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। इस स्कीम में भारत में देसी गायों की स्ट्रैटेजी पर फोकस किया जाएगा।

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