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नाबालिग से दुष्कर्म में लालू के आरोपी विधायक को बचाने में जुटी सरकार, मिटाए जा रहे हैं सबूत

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पटना: सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपराध से वास्ता रखने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करके अपनी पीठ जनता के सामने जरूर थपथपा रहे हैं। पर सच तो ये है कि उन्ही विधायकों पर सरकार की मेहरबानी बैकडोर से बरस रही है। क्योकि जिस तरह से पिछले दरबाजे विधयकों को बचाने की साजिश सरकार कर रही है उससे ये साफ दिखता है कि सरकार की नीयत में खोंट है। बानगी के तौर पर देखें आरजेडी के निलंबित विधायक राज बल्लभ यादव नाबालिग से रेप केस में जेल के अंदर हैं। लेकिन जेल के बाहर कोई ऐसा जरूर है जो उन्हे बचाने की कोशिश कर रहा है। ताजा मामला सबूतों के साथ छेड़छाड़ का है। क्योकि फोरेंसिक जांच के बाद जो रिपोर्ट आई है। उसे देख कर ऐसा लगता है कि सत्ताधारी पार्टी के विधायक होने का फायदा उन्हे मिल रहा है। इससे पहले गया में हुए आदित्य हत्या कांड में भी पुलिस द्वारा सबूतों के साथ लापरवाही जरतने का मामला सामने आ चुका है।

फोरेंसिक जांच में नहीं मिले ठोस साक्ष्य – पुलिस ने राजबल्लभ पर आरोप साबित करने के लिए फोरेंसिक साइंस लौबोरेटरी को छह कपड़े जांच के लिए भेजे थे। जिसमें पीड़िता के कपड़े और विधायक के घर से लिए गए बिछावन, तकिया और चादर को शामिल किया गय़ा था। लेकिन फोरेंसिक टीम ने जो रिपोरेट दी है उसमें लिखा है कि इन कपड़ो में स्पर्म के निशान नहीं मिले हैं। लेकिन चौकाने वाली बात ये है कि उन सभी कपडों से डिटर्जेंट की महक आ रही है। मतलव साफ है, जांच से पहले सबूत मिटाने के लिए सभी कचड़ों को अच्छी तरह से धोया गया है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर जब पुलिस ने कपड़ों को अपने कब्जे में लिया को फिर उसे कौन धुल सकता है। मानलिया जाए की पुलिस के पहुंचने से पहले विधायक ने अपने घर के कपड़े धुलवा दिए थे। लेकिन पीड़िता के कपड़ो से भी डिटर्जेंट की महक कैसे आ रही है।

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