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इस शख्स ने फेसबुक को सबसे अच्छा जरिया मान कर अपना ‘Humans of Bombay’ नाम का पेज बनाया। जिसमें उसने अपने दर्द को लोगों के सामने रखा। उसने बताया कि सात साल की उम्र में उसने यह सब पहली बार झेला था। जब तक उसे नहीं पता था कि यह सब क्या है, उसे सब नॉर्मल लगा। हां, दर्द होता था। कुछ दिनों बाद यह हालत हो गई कि चाचा के घर जाने के बाद वह खुद ही बिस्तर पर लेट जाता था, ताकि सब कुछ जल्द से जल्द खत्म हो जाए।

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