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साभार – logicalbharat.com

आप में से काफी कम लोग ही होंगे जिन्होंने इनके बारे में सुना होगा…..ये फ्रीस्टाइल कुश्ती के खिलाडी है …और मिट्टी पर खेली जाने वाली कुश्ती में भारत मे इनकी टक्कर का कोई पहलवान भी नहीं है!खेलों के काफी नज़दीक रहा हूँ और नेशनल -इंटरनेशनल खिलाडियों से भी मिलता रहता हूँ लेकिन ऐसी शख्सियत से मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी!

हम में से अधिकतर लोग अपने जीवन में हो रही समस्यों से जल्द ही हार ये सोच कर मान जाते है की “होनी में यही लिखा होगा ,ये चीज मेरे बस की नहीं है ,मेरी तो किस्मत ही खराब है ,काश ऐसा न हुआ होता ,भगवान ने क्यों मेरे साथ ही ऐसा किया और न जाने क्या क्या कह कर अपने हारे हुए मन को दिलासा देते है और अपने Failures को उचित ठहरा कर रोज़ वही घिसी -पिटी ज़िंदगी जीते है!
आज आपके साथ ऐसे इंसान की कहानी साँझा करने जा रहा हूँ ,जो शायद आपको आपके जीवन में हो रहे उतार-चढ़ाव से लड़ने की और लड़ते ही रहने की प्रेरणा दे!

इस कहानी की पृष्ठभूमि हरियाणा है जहाँ खेलों के नाम पर कुश्ती और कबड्डी ही खेली जाती रही है!हर गांव -देहात में आज भी आपको एक जोहड़,एक मंदिर और एक अखाडा तो जरूर मिलेंगे!

ऐसा ही एक गांव है सासरौली (डिस्ट्रिक्ट झज्जर) जहाँ एक सामान्य से परिवार में दिनाक 1 अप्रैल 1986 जन्मे बेटे को उसके पिता जी (अजीत सिंह जो पेशे से खुद भी एक पहलवान थे) ने पहलवान बनाने का ही सपना संजोया था! बेटा जब 3-4 साल का हुआ तब घरवालों ने बेटे में कुछ असामान्य बदलाव को नोटिस किया! वो अब ना के बराबर बोलता और ऊँचा ही सुनता!.धीरे धीरे उसकी बोलने और सुनने की शक्ति जाती रही! घरवालों पर मानो जैसे बिजली सी टूट पड़ी थी .जितना उनके बस में था उतना उन्होंने किया .. कभी उस डॉक्टर के पास कभी किसी और की पास …कुदरत इस कदर रूठेगी ये न सोचा था!

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