जरूर पढ़िये: मच्छरों से बचने के प्राकृतिक सप्तसूत्री उपाय

मच्छरों से मुक्ति

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विनय झा :- जहरीले रसायनों से बने मच्छर भगाने या मारने वाले उत्पाद बाज़ार में धड़ल्ले से मिल जायेंगे, किन्तु मच्छरों से अधिक मनुष्यों को उनसे क्षति पहूँचती है | मच्छरों को मारना जीवहत्या भी है, उन्हें भगाने का उपाय होना चाहिए | ऐसे बहुत से उपाय हैं, किन्तु जहरीले रसायन बेचने वाली कम्पनियां तो विज्ञापन पर पैसा खर्च कर सकती है, जबकि स्वस्थ और प्राकृतिक उपायों के प्रचार से मीडिया को लाभ नहीं है !

मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर सप्तसूत्री उपाय प्रस्तुत कर रहा हूँ :–

1 → सबसे कारगर है एक पौधा जिसका नाम किसी को पता नहीं है | दक्षिण भारत (उडुपी, कर्नाटक) से मार्च 2011 में कार द्वारा लौटते समय मध्यप्रदेश के जंगल में एक साधु की कुटी में यह पौधा मैंने देखा था जिसकी गन्ध मनुष्य को नहीं लगती, किन्तु तुलसी पौधे के आकार के इस पौधे के कारण कई एकड़ तक जंगल में एक भी मच्छर (और अन्य कीटाणु) नहीं मिला ! वह स्थान है जबलपुर नगर के दक्षिणी छोर से बीस किलोमीटर दक्षिण | जबलपुर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के ठीक किनारे लगभग बीस-पच्चीस मीटर ऊँची हनुमान जी की लाल मूर्ति है | वह मन्दिर और संलग्न आश्रम हिनौता ग्राम के अन्तर्गत पड़ता है, यद्यपि गाँव हटकर है, आश्रम का क्षेत्र जंगली है | उसी आश्रम में यह पौधा है | वहाँ के साधु महाराज ने मुझे बताया कि वे एक स्थान पर अधिक दिनों तक नहीं टिकते, अतः हो सकता है अब वे वहाँ नहीं मिले और उस पौधे की जानकारी वहाँ किसी अन्य व्यक्ति को न हो ! पिछले पाँच वर्षों के दौरान मैंने बहुत लोगों को यह जानकारी दी जिनमे कुछ तो उसी क्षेत्र के हैं, किन्तु किसी ने उस आश्रम तक जाने का कष्ट नहीं किया | उस पौधे का प्रचार हो जाय तो पूरी मानवजाति का भला होगा | साधु महाराज ने कहा कि वर्षा के मौसम में उस पौधे के बीज निकलते हैं, किन्तु वर्षा के दौरान वहाँ जाने का मुझे अवसर नहीं मिला |

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2 → इन्टरनेट पर सर्च करने से बहुत से पौधों के विवरण मिल जायेंगे जिनके प्रभाव से मच्छर भागते हैं | वे पौधे दुर्लभ हैं, कुछ पौधे नर्सरी में मिल जायेंगे | उनमें से एक पौधा सर्वसुलभ है जिसका प्रभाव मच्छर ही नहीं, लगभग सभी कीटों पर पड़ता है, यद्यपि प्रभाव अधिक नहीं है — गेन्दा | प्लास्टिक की बाल्टी में गेन्दा का पौधा लगाएं, दिन भर धूप में रखे और सायं कमरे में ले आयें | सारे मच्छर तो नहीं भागेंगे, किन्तु अधिकाँश भाग जायेंगे और जो बचेंगे उनकी शक्ति अपनी जान बचाने में लग जायेगी, बहुत कम मच्छर ही आपको काट पायेंगे | कीड़े-मकोड़े भी भाग जायेंगे | बनारस में मैं इस विधि का प्रयोग तब करता था जब मैं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भीतर रहता था | बाद में जहाँ मेरा आवास था वहाँ ऐसा सम्भव नहीं हो सका, क्योंकि सबसे ऊपर की मंजिल पर केवल मेरा ही फ्लैट था जहाँ मेरी अनुपस्थिति में पानी देने वाला कोई नहीं था जिस कारण सारे पौधे सूख गए | किन्तु बगल में अस्सी नाले की गन्दगी के बावजूद वहाँ मच्छर बहुत कम थे |

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3 → भोजन में तेल, मसाले, मिर्च, आदि मैंने बीस वर्ष पहले त्याग दिया था जिस कारण मच्छरों को मेरा रक्त स्वादिष्ट नहीं लगता था ! इन्द्रियाँ सभी जीवों के पास होती हैं, भले ही वैज्ञानिकों को दिखे या न दिखे | मच्छर आसुरी योनि का जीव है जिसकी उत्पत्ति एक राक्षसी से हुई है (योग वासिष्ठ)| असुरों में ऐन्द्रिकता अत्यधिक होती है, अतः स्वाद के प्रति मच्छर आकर्षित होता है | सात्विक भोजन करने वालों पर मच्छर का आक्रमण तभी होता है जब स्वादिष्ट रक्त वाले मनुष्य आसपास न हो | इस बात को हँसी में न लें | मेरे कमरे में बैठे दूसरे लोगों को मच्छर काटते रहते थे जिनके कारण मुझे जहरीले रसायन वाले उत्पाद खरीदने पड़ते थे |

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4 → सरसों का तेल चमड़ी पर रोजाना मालिश करें | भोजन में तेल बिलकुल न लें, सम्भव हो तो भोजन में देसी गाय का शुद्ध घी प्रयुक्त करें | किन्तु मालिश में सरसों का तेल न केवल मच्छरों को बल्कि बैक्टीरिया से लेकर अन्य सभी कीटों को दूर भगाएगा | चमड़ी पर जबतक तेल का प्रभाव रहेगा तबतक मच्छर चाहकर भी नहीं काटेंगे | जहाँ अधिक समय तक बैठना हो और मच्छर परेशान करें वहाँ खुले अंगों, जैसे कि हाथ-पाँव, पर सरसों का तेल मल लिया करें | बाजारू रसायनों का दुष्प्रभाव सरसों के तेल में नहीं होता | सरसों का तेल प्राकृतिक एन्टी-बायोटिक है | आपने देखा होगा कि आम के अचार को गृहिणियां सरसों के तेल में डुबाकर सालों-साल सुरक्षित रखती हैं | किन्तु शरीर के भीतर देशी गाय का घी सर्वोत्तम एन्टी-बायोटिक है जो इम्यून प्रणाली को शक्ति देकर सभी रोगों से लड़ने की क्षमता देता है |

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5 → शहर में कूड़े के भण्डार से, रुके हुए जल के सड़ने से, आदि कारणों से शहर में मच्छर का प्रकोप बढ़ता है यह तो सर्वविदित है | नागरिक समितियां बनाकर नगरपालिका पर भी दवाब बनाएं और स्वयंसेवक बनकर स्वयं भी शहर की सफाई करें | घर और आसपास गन्दगी न रहने दें, और यदि गन्दगी है तो (फिनाइल या) रामदेव के गोनाइल का प्रयोग करें |

6 → सायंकाल मच्छरों के गृहप्रवेश का मुहूर्त होता है | गाँवों में लोग उस समय गोबर के उपले (गोइठे) का धूआँ करते हैं ताकि मनुष्यों और मवेशियों के वासस्थल से मच्छर दूर भाग जाएँ | शहर में भी सायंकाल कुछ देर के लिए छोटे से मिटटी के गमले में गोबर के उपले का धूआँ करके बाद में दरवाजे और खिड़कियाँ बन्द कर दें या जालीदार खिड़कियों का प्रयोग करें | सोने के कमरे में बाजारू रसायनों के स्थान पर मसहरी का प्रयोग करें | वैसे भी बाजारू रसायनों के प्रति मच्छरों में प्रतिरोधक शक्ति बहुत बढ़ गयी है जिस कारण अब बहुत अधिक बाजारू रसायनों का प्रयोग करना पड़ता है जिनका दुष्प्रभाव मनुष्यों पर भी पड़ता है, खासकर बच्चों पर |

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7 → आजकल लोग सफ़ेद सीमेंट से ह्वाईट-वाश कराने लगे हैं | यदि ऐसा ही करना हो तब भी उसपर (पान आदि में प्रयुक्त) खाने वाले चूने की एक परत ह्वाईट-वाश करा दें — बहुत से कीड़े-मकोड़े घट जायेंगे, कम से कम छ मास तक |

तीस वर्ष पहले मैंने खाने वाले चूने में DDT पाउडर मिलाकर ह्वाईट-वाश कराया था तो लगभग एक वर्ष तक घर में मच्छर का दर्शन नहीं हुआ था | किन्तु सम्भवतः कैंसर की सम्भावना के कारण उस पाउडर पर पाबन्दी लग गयी है, ऐसा लोगों ने बताया है | वैसे भी मैं कृत्रिम रसायनों का विरोधी हूँ | उनके दीर्घकालीन साइड-इफ़ेक्ट वैज्ञानिकों को भी ठीक से पता नहीं रहते | अतः प्राकृतिक साधनों का प्रयोग करें, प्रकृति माँ की सन्तान बनें | मच्छरों की हत्या से बचें, वे तो अचेत और विवश हैं, आप तो चेतन हैं ! मच्छर में ठीक वैसा ही जीव है जो आपमें है, केवल संस्कारों में तमगुण अधिक होने से कोई मच्छर बन गया और कम होने से मनुष्य ! अतः अहंकार न करें |

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अन्य कोई उपाय हों तो मुझे भी सूचित करें  : नीम के तेल से बेहतर है नीम के पत्तों को पीसकर एक चौथाई कर्पूर मिला दें और उसे तरल बनाने के लिए मिटटी का तेल मिलाकर All-Out की खाली रिफिल में भरकर प्रयोग करें | गेंदे के फूल को पीसकर उसे भी उक्त तरल में मिला सकते हैं |

बनारस में मेरे आवास के बगल में नीम का विशाल पेड़ है जिस कारण बगल में अस्सी नाले की गन्दगी के बावजूद बहुत कम मच्छर मेरे आवास की ओर आते हैं | मेरे आवास में मैं अकेला रहता हूँ और मेरा रक्त स्वादिष्ट भी नहीं है, एक बार जो मच्छर चख लेगा वह दुबारा पास नहीं फटकेगा |

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