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जब भी आप थिएटर में फ़िल्म देखने जाते हैं तो शुरुआत में एक सेंसर बोर्ड का एक सर्टिफिकेट दिखाया जाता है जो थोड़ी देर के लिए आपकी नज़रों के सामने होता है. ज़्यादातर लोग इस सर्टिफिकेट पर ध्यान ही नहीं देते हैं, कुछ ये देख लेते हैं कि फ़िल्म कितने रील की है और कितनी देर चलेगी और कुछ बातों में लग जाते हैं. भाई साहब, ये सर्टिफिकेट बहुत ज़रूरी है. इसी सर्टिफिकेट के लिए फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक सेंसर बोर्ड के चक्कर काटते रहते हैं. हमें शायद इस सर्टिफिकेट से इतना लगाव न हो, लेकिन एक फ़िल्मकार के लिए इसकी बहुत एहमियत है. तो आपको समझाते हैं कि इस सर्टिफिकेट में दिखाए गए अलग-अलग भागों का क्या अर्थ होता है.

1. इस फ़िल्म को किस तरह का सर्टिफिकेट मिला है. अगर ‘अ’ है तो इसका मतलब कोई भी इस फ़िल्म को देख सकता है. जानते हैं कि फ़िल्म की शुरुआत में दिए गए फ़िल्म सर्टिफिकेट का आखिर अर्थ क्या होता है
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2. अगर इस सर्टिफिकेट पर ‘अव’ लिखा है तो इसका अर्थ है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चे इस फ़िल्म को माता-पिता के निर्देशन में देख सकते हैं. जानते हैं कि फ़िल्म की शुरुआत में दिए गए फ़िल्म सर्टिफिकेट का आखिर अर्थ क्या होता है

3. अगर फ़िल्म को ‘व’ सर्टिफिकेट मिला है तो मतलब 18 साल से कम उम्र के लोगों के लिए ये फ़िल्म अनुकूल नहीं है. जानते हैं कि फ़िल्म की शुरुआत में दिए गए फ़िल्म सर्टिफिकेट का आखिर अर्थ क्या होता है

4. जिन फ़िल्मों को ‘S’ सर्टिफिकेट मिलता है, वो स्पेशल ऑडियंस के लिए होती हैं जैसे डॉक्टर या साइंटिस्ट. जानते हैं कि फ़िल्म की शुरुआत में दिए गए फ़िल्म सर्टिफिकेट का आखिर अर्थ क्या होता है

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