ऐसे बहुत से आतंकवादी इसी फेसबुक पर हमारे आस पास भी हैं। पहचानिये, सावधान रहिये।

ब्लॉग : Sharad Shrivastav :- पिछले कुछ दिनों से बंगाल के बारे में एक खबर लगातार अखबारों में छप रही है। खबर छोटी है और कहीं पर भी चर्चा में नहीं आयी। कुछ दिन पहले 17 या 18 जनवरी को बंगाल के 24 परगना जिले में सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस फायरिंग में 2 लोग मारे गए।मामूली खबर जिसमे किसी की रूचि नहीं हुई। देश में दर्जनों लोग रोज मारे जा रहे हैं। फिर ऐसी घटना का संज्ञान क्यों लिया जाए।

खैर ……..
कहानी कुछ यूँ है की कुछ साल पहले एक योजना बनी। जिसमे फरक्का बिजलीघर से बिजली की सप्लाई बिहार के कुछ औद्योगिक इलाकों में की जानी थी। इसके लिए पॉवर ग्रिड को ट्रांसिमिशन लाइन बिछानी थी। और कुछ पावर सब स्टेशन बनाने थे। ऐसे तमाम पावर स्टेशन में से एक बंगाल के 24 परगना जिले के बांगुर में बनना था। करीब दो साल पहले बंगाल की ममता सरकार ने इस गांव में 16 एकड़ जमीन अधिग्रहित की। इस जमीन में पावर सब स्टेशन और वहां के लोगों के लिए घर बनने थे। 16 एकड़ वैसे कोई बहुत बड़ी जगह होती भी नहीं है।ये जमीन कृषि जमीन थी। किसानों को सरकार ने ठीक से कंपनसेशन भी दिया। प्रोजेक्ट सरकारी था। कहीं कोई दिक्कत नहीं थी। पावर ग्रिड ने निर्माण का काम शुरू कर दिया।

लेकिन फिर दिक्कत आयी
एक नामालूम सा संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( माले) ( रेड स्टार) के कुछ कार्यकर्त्ता उस गांव में पहुंचे। सीपीआई या भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एक संसदीय संघटन है। सीपीआई ( माले) पहले बिहार में एक नक्सल संगठन था , लेकिन हिंसा छोड़कर वो अब संसदीय पार्टी बन चुका है। सीपीआई माले ( रेड स्टार) एक नया संगठन है जो कहने को इनकी तरह ही संसदीय पार्टी है। लेकिन उसके तार माओइस्ट संगठनों से नक्सल आतंकवादियो से भी जुड़े हैं।

सीपीआई माले रेड स्टार के कार्यकर्ताओ ने किसानों ग्रामीणों को भड़काना संगठित करना शुरू किया। ग्रामीणों को समझाया गया की ये पावर सब स्टेशन नहीं पावर प्लांट बनाने की योजना है। जिसमे लाखों वोल्ट बिजली होगी जो आस पास की फसलो को तबाह कर देगी। लोगों के स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचाएगी।

The effects of the electromagnetic fields generated by this massive power plant on human health, livelihood, and ecology have not been taken into account. These effects will cause havoc on the livelihoods of the people. उपरोक्त लाइने उस दुष्प्रचार का हिस्सा हैं जो बंगाल के ग्रामीणों को समझाई गयी। एक मामूली पावर सब स्टेशन को इन लोगों ने मैसिव पावर प्लांट में बदल दिया। और फिर इस महीने की शुरुआत में ग्रामीणों ने अपना विरोध शुरू किया। विरोध की खबर पाते ही ममता सरकार ने पावर ग्रिड को काम रोकने का आदेश दिया। सरकारी अधिकारियों और ग्रामीणों की बैठक हुई , जिसमे सरकारी अधिकारियों ने ग्रामीणों को वस्तुस्थिति समझाने का प्रयास किया।

लेकिन गांव वालों ने जमीन वापस करने की मांग रखी और पावर सब स्टेशन को गांव से हटाने को कहा। जाहिर था की ये मांगे सरकार नहीं मान सकती थी , न ही मानी जानी चाहिए।

खैर ममता सरकार ने इस विरोध के मुखिया को पुलिस द्वारा रात में उठवा लिया। जिसके नतीजे में अगले दिन ग्रामीणों ने सड़क रोक कर विरोध शुरू किया। सरकार ने भारी पुलिस बल को भेजा ताकि रास्ता खुलवाया जा सके। ग्रामीणों और पुलिस में हिंसक संघर्ष हुआ। दो ग्रामीण गोली लगने से मारे गए , दर्जनों गांव वाले और पुलिस वाले घायल हुए। तमाम वाहन जिसमे पुलिस के वाहन भी थे आग के हवाले हो गए।

इसके बाद मामले का राजनीतिकरण हुआ
प्रसंगवश उसी समय कलकत्ता के साल्ट लेक में बंगाल ग्लोबल इन्वेस्टर मीट चल रही थी जिसमे विदेश और देसी दोनों तरह के बड़े लोग आये हुए थे। सीपीआई के नेताओ और कार्यकर्ताओ ने इन्वेस्टर मीट के वेन्यू के बाहर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जवाब में ममता सरकार ने उन सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया। सीपीआई ने ममता सरकार पर किसानों की जमीन लूटने का आरोप लगाया। जवाब में ममता ने सीपीआई को सिंगुर याद दिलाया। सिंगूर में सीपीआई सरकार द्वारा किये गए जुल्मो की याद दिलाई। कांग्रेस ने ममता सरकार पर किसान मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया।

और मैं सोच रहा था की मोदी सरकार अम्बानी अडानी की सरकार है। यही दो साल पहले यही पार्टियां मोदी सरकार पर जमीन अधिग्रहण कानून को लेकर बड़े बड़े आरोप लगा रही थीं। बेसिकली इसी विधेयक के बाद मोदी सरकार को बौद्धिकों ने अम्बानी अडानी की सरकार घोषित किया था। लेकिन एक बेसिक बात पर तब भी और आज भी कोई ध्यान नहीं देता की जमीन राज्य सरकार अधग्रहीत करती है और केंद्र सरकार मॉडल कानून बनाती है। हर राज्य के जमीन अधिग्रहण के कानून अलग हो सकते हैं , होते हैं।

खैर कहानी अभी खत्म नहीं हुई। कुछ दिनों पहले सीपीआई माले रेड स्टार के एक बड़े नेता केरल से कलकत्ता पहुंचे और पहुँचते ही रेलवे स्टेशन से किडनैप हो गए। तीन दिन बाद वो दिल्ली में मिले। उन्होंने बताया की उन्हें कुछ इंटेलिजेंस के लोगों ने उठा लिया था। दो दिन पूछताछ के बाद उन्हें दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में बिठाकर छोड़ दिया गया। इन साहब ने किडनैपिंग का आरोप ममता दी पर लगाया , मोदी सरकार पर नहीं। गांव अभी भी जल रहा है। गांव की सीमा पर ग्रामीण पहरा दे रहे हैं सिर्फ पत्रकारों को गांव में जाने दिया जा रहा है। इस सीमा के दूसरी तरफ भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात है। सिर्फ एक चिंगारी की जरूरत है। और इस चिंगारी को सुलझाने के लिए तमाम एक्टिविस्ट , नक्सली और माओवादी वहां मौजूद हैं।

आतंकवाद सिर्फ इस्लामिक नहीं होता , बौद्धिक आतंकवाद भी होता है। ज्यादा निर्मम , ज्यादा खतरनाक। जो लोगों को भड़का रहा है। सिस्टम और सरकार के खिलाफ कर रहा है। ऐसे बहुत से आतंकवादी इसी फेसबुक पर हमारे आस पास भी हैं। पहचानिये , सावधान रहिये।