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देश के विजयी विश्व तिरंगे की अभिकल्पना देने वाले पिंगाली वैंकय्या का जन्म साल 1876 में 2 अगस्त को हुआ था।

पिंगाली की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह महज 19 साल की उम्र में ब्रिटिश इंडियन आर्मी से जुड़े। वहीं एंग्लो बोएर जंग में हिस्सा लिया, जहां पर उनकी मुलाकात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से हुई।

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उर्दू और जापानी सहित कई भाषाओं का ज्ञान रखने वाले पिंगाली जियोलॉजी में डॉक्टरेट थे।

उन्हें ‘डायमंड वैंकय्या’ भी कहा जाता था, क्योंकि पिंगाली को हीरों के खनन की विशेष जानकारी थी।

साल 1921 में पिंगाली ने केसरिया और हरा झंडा सामने रखा, उधर जालंधर के लाल हंसराज ने इसमें चरखा जोड़ा और गांधीजी ने सफ़ेद पट्टी जोड़ने का सुझाव दिया।

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भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी का केसरिया रंग देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच की सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्‍य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को चिह्नित करती है।

तिरंगे को वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था, जो 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व आयोजित की गई थी।

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