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मधु प्रकृति द्वारा मनुष्य को उत्तम भेंट है जो पंचामृत में से एक अमृत है। मधु आयुर्वेद में अधिकांश भाग की दवाइयों के लिए श्रेष्ठ अनुपान है। प्राकृतिक रूप से मधु में विपुल राशि में शर्करा होती है। मधु तुरन्त शक्ति और गर्मी देकर मांसपेशियों को बल प्रदान करता है। रात में एक चम्मच शहद पानी के साथ लेने से नींद ठीक से आ जाती है। पेट साफ होता है। खाली पेट मधु और नींबू का शरबत भूख लगाता है।

मधु जीवाणुओं का नाश करता है। टाइफाईड और क्षय के रोगियों के लिए भी मधु उत्तम है।

हजारों वर्षों तक भी मधु बिगड़ता नहीं। मधु बच्चों के विकास मे बहुत उपयोगी है। यदि बालक को प्रारंभिक नौ महीने मधु दिया जाये तो उसे छाती के रोग कभी न होंगे। मधु से अँतड़ियों में उपयोगी एसिकोकलिस जीवाणुओं की वृद्धि होती है। मधु दुर्बल और सगर्भा स्त्रियों के लिए श्रेष्ठ पोषणदाता आहार है। मधु दीर्घायुदाता है। रशिया के जीवशास्त्री निकोलाइना सिलिव प्रयोगों के अंत में कहते हैं कि रशिया के 200 शत-आयुषी लोगों का धंधा मधुमक्खी के छत्ते तोड़ना है और मधु ही उनका मुख्य आहार भी है।

दुर्बलता दूर करके शक्ति बढ़ाने के लिए मधु जैसी गुणकारी वस्तु विश्व में अन्य कोई नहीं है। मधु शरीर की मांसपेशियों को शक्ति देता है। अतः अविराम कार्य करने वाली सबसे महत्त्वपूर्ण मांसपेशी हृदय के लिए मधु अत्यंत उपयोगी है। मधु से मंदाग्नि दूर होक भूख लगती है। वीर्य की वृद्धि होती है। आबालवृद्ध सबके लिए मधु हितावह है। बालकों को जन्मते ही दिया जा सके ऐसा एकमात्र भोजन मधु है।honey (3)

मधु के खनिज तत्त्व रक्तनिहित लाल कणों की वृद्धि में सहायक बनते हैं। गर्भवती और प्रसूता माता को भी बालक के हितार्थ शहद का सेवन करना चाहिए। रोगी और कमजोर को मधु शक्ति देता है। शारीरिक परिश्रम करनेवालों को यह शक्ति देता है कारण कि उसे पचाने में शक्ति लगानी नहीं पड़ती  और शक्ति का भंडार मिलता है। मधु के इन गुणों का कारण वह पंचमहाभूत का सार है। अंतिम रस है। मधु उत्तम स्वास्थ्यवर्धक है और साथ-साथ शरीर के रंग को निखारने का, त्वचा को कोमल बनाने का और सुन्दरता बढ़ाने का काम भी करता है। चेहरे और शरीर पर यदि शहद की मालिश की जाये तो सौन्दर्य अक्षय बनता है। अच्छे साबुनों में मधु का उपयोग भी होता है।

मधु, नींबू, बेसन और पानी का मिश्रण चेहरे पर मलकर स्नान करने से चेहरा आकर्षक और सुन्दर बनता है। मधु के सेवन से कंठ मधुर, सुरीला और वाणी मीठी बनती है। दैवी गुणों की वृद्धि होती है। मानव विवेकपूर्ण और चारित्र्यवान बनता है।

मधु शरीर-मन-हृदय का दौर्बल्य, दम, अजीर्ण, कब्ज, कफ, खाँसी, वीर्यदोष, अनिद्रा,थकान, वायुविकार तथा अन्य असंख्य रोगों में रामबाण दवाई है।

मधु हरेक खाद्य पदार्थ के साथ ले सकते हैं। धारोष्ण दूध (एकदम ताजा निकाला हुआ) और फलों के रस में मधु ले सकते हैं। मधु ठंडे पानी में लेना हितावह है। मधु गरम नहीं करना चाहिए। मछली, मधु और दूध साथ में खाने से कफेद कोढ़ होता है। कमलबीज,मूली, मांस के साथ मधु लेना वर्जित है। मधु और बारिस का पानी सममात्रा में नहीं पीना चाहिए। तदुपरांत घी, तेल जैसी चर्बीयुक्त पदार्थों के साथ मधु समान मात्रा में लेना विष के समान होता है। बोतलों में पैक लैबोरेटरी में पास कराया हुआ कृत्रिम मधु जो दुकानों पर बिकता है वह उतना फायदा नहीं करता जितना असली मधु से होता है।

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