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गर्मी के दिनों में जो हवा चलती है उसे लू कहते हैं।

लक्षणः लू लगने से चेहरा लाल हो जाता है, नब्ज तेज चलने लगती है। साँस लेने में कष्ट होता है, त्वचा शुष्क हो जाती है। प्यास अधिक लगती है। कई बार सिर और गर्दन में पीड़ा होने लगती है। कभी-कभी प्राणी मूर्च्छित भी हो जाता है तथा उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

उपायः लू चलने के दिनों में पानी अधिक पीना चाहिए। सुबह 700 मि.ली. से सवा लीटर पानी पीने वालों को लू लगने की संभावना नहीं होती। घर से बाहर जाते समय कानों को रूमाल से ढँक लेना चाहिए। जब गर्मी अधिक पड़ रही हो तब मोटे, सफेद और ढीले कपड़े पहनने चाहिए। दिन में दो बार नहाना चाहिए। एक सफेद प्याज (ऊपर का छिलका हटाकर) हमेशा साथ रखने से लू लगने की संभावना नहीं रहती। प्याज और पुदीना लू लगने के खतरे से रक्षा करते हैं। घर से बाहर जाने से पहले पानी या छाछ पीकर निकलने से लू नहीं लगती। नींबू का शरबत पीना हितकर होता है।

लू व गर्मी से बचने के लिए रोजाना शहतूत खायें। पेट, गुर्दे और पेशाब की जलन शहतूत खाने से दूर होती है। यकृत और आँतों के घाव ठीक होते हैं। नित्य शहतूत खाते रहने से मस्तिष्क को ताकत मिलती है।

यदि लू लग जाय तो लू का असर दूर करने के लिए कच्चे आम उबालकर उसके रस में पानी मिलाकर घोल बनायें तथा उसमें थोड़ा सेंधा नमक, जीरा, पुदीना डालकर पियें।

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