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सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित हुईं पाकिस्तान की मलाला यूसुफ़ज़ई को कौन नहीं जानता। पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रांत की यह लड़की बाल अधिकार और लड़कियों को शिक्षित करने के प्रयास में मौत से भी सामना कर उसे हरा चुकी है।

लेकिन क्या आप जानते हैं, कि मलाला इस्लाम भी ‘छोड़ना’ चाहती हैं? यह हम नहीं, बल्कि फ़ेसबुक पर शेयर हो रही यह तस्वीर कह रही है। देखें,

malala

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इस तस्वीर को शेयर करने वाली प्रोफ़ाइल है ‘मातृभूमि के गद्दार और देशद्रोही’। अब यह तो आप नाम से ही जान गए होंगे कि यह तस्वीर इस तरह क्यों शेयर हो रही है। इस झूठी तस्वीर पर मलाला के हवाले से कहा गया है, ‘खुशनसीब हैं वे लोग गैर-इस्लामी देशों में रहते हैं। आज भी पाकिस्तान, बांग्लादेश, सौदी अरेबिया, इरान, इराक, सोमालिया, अफगानिस्तान जैसे मुसलमान राष्ट्रों में लड़कियों के स्कुल (स्कूल) जाने पर पाबंदी है। इस्लाम ने हमें आतंकवाद, मदरसे, हिंसा, दंगे, बम धमाकों के अलावा कुछ नहीं दिया। इस्लाम और अमन कभी एक साथ नहीं रह सकते। अच्छे भविष्य के लि हमें इस्लाम का त्याग करना ही होगा।’ नीचे सवाल भी किया गया है कि, ‘क्या आप भी सहमत हैं? मलाला यूसुफजई की से’… आप यहाँ क्लिक करके यह पोस्ट देख सकते हैं।

हम आपको बता दें कि इस सवाल और इस बात दोनों पर ही सहमत-असहमत होने की कोई ज़रूरत नहीं है। क्योंकि ऐसी कोई बात मलाला ने कही ही नहीं है। मलाला को अपने मुस्लिम होने पर फ़ख़्र है और उनका इरादा वही है जिस पर अब तक वह अमल करती आई हैं यानी बाल अधिकार को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखना। तस्वीर में जो शब्द इस्लाम के लिए कहे गए उनके उलट कई बातें मलाला ने इस इंटरव्यू में की हैं। देखें,

यूके के ‘चैनल 4’ को दिए इस इंटरव्यू में मलाला ने कहा कि उन्हें मुसलमान और फ़ेमिनिस्ट होने पर गर्व है। मलाला ने इस्लामोफ़ोबिया का विरोध किया और इस्लाम को शांति और समानता का धर्म बताया।

interview

आप यह पूरा इंटरव्यू यहाँ क्लिक करके देख सकते हैं। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि राजनेताओं और मीडिया को इस्लाम और मुसलमानों के बारे में बोलते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आपका इरादा आतंकवाद को रोकना है तो सभी मुसलमानों को दोष मत दीजिए क्योंकि इससे आतंकवाद नहीं रुक सकता।

तो यह था मलाला के नाम पर झूठ का प्रचार कर रहे पोस्ट का सच। जिस प्रोफ़ाइल से इस पोस्ट को शेयर किया गया, उसका नाम ही समाज में सबकुछ ख़ुद ही तय करता सा लगता है।

profile

आप यहाँ क्लिक करके पूरा प्रोफ़ाइल देख सकते हैं। हमारा मानना है कि वैचारिक रूप से कमज़ोर लोग ही झूठ का सहारा लेते हैं।

इस झूठ के बारे में हमारे पाठक ने हमें बताया।

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