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नेताओं ने चूस लिया धरती माँ का बूंद-बूंद पानी - स्पेशल

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महाराष्ट्र में मराठवाड़ा के आठ ज़िलों में सूखा इतना भयानक है कि ये इलाक़ा महाराष्ट्र की पहली मरुभूमि बनने की राह पर है। विश्लेषक इसका कारण मराठवाड़ा में गन्ने की खेती को मानते हैं, जिसके लिए पानी की भारी मात्रा में ज़रूरत होती है।

एक आंकड़े के मुताबिक़ एक किलो चीनी बनाने पर क़रीब ढाई हज़ार लीटर पानी खर्च होता है और महाराष्ट्र की पांच फ़ीसदी कृषि ज़मीन पर गन्ने की खेती होती है और इसमें राज्य का 70 फ़ीसद पानी लग जाता है। महाराष्ट्र के केवल छह फ़ीसदी किसान गन्ने की खेती करते हैं। सूखे की समस्या का हल आसान नहीं है क्योंकि राज्य में हर साल पैदा होने वाला लाखों टन गन्ना जिन चीनी मिलों में जाता है, उनमें से अधिकांश के मालिक महाराष्ट्र के नेता है।  ये नेता सभी प्रमुख पार्टियों से जुड़े हैं। 

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