रिपोर्ट पढ़िये: भारतीय मीडिया का ज्ञान कितना घटिया है, देश की असलियत से कितने कटे हुए हैं….

लेकिन दुर्भाग्य ये है कि ना तो इसको स्थानीय सामाजिक संगठनों ने कभी बहुत बड़ा मुद्दा बनाया और ना ही चुनाव में बहुत बड़ा मुद्दा बना। हिन्दू संगठनों और भाजपा को सिर्फ गौहत्या से मतलब रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनावों में मेरठ की सभा में इसे मुद्दा बनाया लेकिन प्रधान मंत्री बनने के बाद भूल गए।

लेकिन सबसे हैरानी की बात है कि बगल में ही दिल्ली और नॉएडा में बैठे तथाकथित बुद्धिजीवी, ओपिनियन मेकर्स और राष्ट्रीय मीडिया वालों को इतने बड़े मुद्दे की कोई खबर ही नही। इनकी हिम्मत या जाहिलपना देखिये कि ये लोग इन अवैध बूचड़खाने वालो के रोजगार के लिये चिंतित हैं। ये उस राजस्व के नुक़सान की बात कर रहे हैं जो सरकार को कभी मिलता ही नही। इन्हें किसानों के रोजगार से कोई मतलब ही नही।

इन्हें नदियों में बहते खून से, underground पानी के contamination से, पर्यावरण से, लोकल जनता को होती बीमारियों से कोई मतलब नही। यहां तक कि बिसाहड़ा काण्ड को मुद्दा बनाने के बाद भी इन्होंने कभी कोशिश नही कि की ये इसके तह में जाएं। इनके ज्ञान और बुद्धिजीविता का इन्होंने खुद जनाजा निकाल दिया है। ये बिलकुल नंगे हो गए हैं।

हद तो ये है कि इन गधो के प्रोपगंडा के प्रभाव में आकर आजकल के महानगरो के ड्यूड ड्यूडीनी टाइप लोग भी ज्ञान देने लगते हैं जिन्हें आगे पीछे का कुछ नही पता। इस तरह के लोग ये जान ले की ना तो ये मुद्दा शाकाहार बनाम मांसाहार का है और ना ही सिर्फ गौ हत्या का और ना ही हिन्दू-मुस्लिम का है। ये मुद्दा शुद्ध रूप से आर्थिक और पर्यावरणीय है क्योंकि गल्फ देशों को मीट सप्लाई करने और कसाईयो द्वारा अवैध काम करके (जिसमे सरकार को कोई राजस्व ना मिलता हो) मालामाल होने से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता के लिए दूध की उपलब्धता सुनिश्चित कराना और स्वच्छ वायु और जल उपलब्ध कराना है।

और ये लोग अवैध और वैध का मतलब भी जान ले। जो बूचड़खाने सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त हैं और लाइसेंसशुदा संख्या में कटान होता है, सभी नियमो का पालन करते हैं और गौ हत्या नही होती उनपर ना तो प्रतिबन्ध लगा है और ना ही लगेगा। जिन बूचड़खानों में बिना लाइसेंस लिए unhygenic conditions में अवैध तरीके से कटान होता है, अपशिष्ट पदार्थ के उन्मूलन के लिये कोई व्यवस्था नही है, नियमो का पालन नही होता और जिन्हें तीन साल पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंद करने का फरमान जारी किया जा चुका है केवल उन्हें ही बंद किया गया है।

इसलिये ये भाजपा के नेताओ के कमेलो की बात न ही करे। अगर भाजपा के किसी नेता का कमेला अवैध है या नियमो का पालन नही कर रहा और वो अब भी चल रहा है तो उसके सबूत दिखाओ नही तो सिर्फ आलोचना के लिये ही हवा में अटकलबाजी कर अपनी अज्ञानता का प्रदर्शन ना करें।