अरबी टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड ने हिन्दुओं की माँ-बहनों के बलिदान मज़ाक बना दिया : केशर देवी


ख़िलजी यह घाव भूला नहीं और कुछ महीनों बाद लाखों की सेना के साथ उसने आक्रमण कर दिया। दुर्ग की घेराबंदी से खाद्य की आपूर्ति रोक दी। आखिर उसके छ:माह से ज़्यादा चले घेरे व युद्ध के कारण क़िले में खाद्य सामग्री अभाव हो गया तब महाराणा रतन सिंह के नेतृत्व में केसरिया बाना धारण कर हज़ारों राजपूत सैनिक क़िले के द्वार खोल भूखे सिंहों की भांति ख़िलज़ी की लाखों की सेना पर टूट पड़े, भयंकर युद्ध हुआ पर कई गुणी सेना के सामने आखिर छोटी सी सेना कब तक टिकती, महाराणा और किशोर बादल समेत सब मारे गए।

यह खबर किले में पहुंची तो ख़िलजी की बन्दी बनने की अपेक्षा राजपूती आन बान शान के लिए महारानी ने जौहर का निश्चय किया। जौहर के लिए विशाल चिता का निर्माण किया गया। रानी पद्मिनी के नेतृत्व में हज़ारों राजपूत रमणियाँ जौहर चिता में प्रवेश कर गईं। किले के बच्चे और बूढ़े भी चिता में कूद पड़े। थोड़ी ही देर में देवदुर्लभ रूपसौंदर्य अग्नि की लपटों में दहककर क्षत्रिय कीर्ति का अंगारा बनकर चमक उठा । जौहर की ज्वाला की लपटें देख अलाउद्दीन ख़िलज़ी के होश उड़ गए और धर्मकीर्ति की ध्वजा चतुर्दिक फहर गई। यह कहानी इसी रूप में आजतक मेरी स्मृतियों को झंकृत करती रही है।

यह संक्षेप में पद्मिनी के बलिदान की कहानी है, जिसे विकृत करने का अधिकार किसी को नहीं है, आज भी चित्तौड़ के दुर्ग से उन रानियों की चीखें सुनाई देती हैं पर अपनी आत्मा बेचने वाले और माँ बहनों की इज्जत बेचने वाले बॉलीवुड को वह चीखें सुनाई नहीं देंगी क्योंकि पैसे की खनक से कान ही नहीं बन्द होते, आत्मसम्मान भी मर जाता है, स्वाभिमान भी सो जाता है।

धर्मबन्धुओं यह आपत्तिकाल है, आज अगर इन जानवरों का विरोध नहीं किया तो कल ये माता सीता को रावण के साथ सुखी बताएंगे और राम को आततायी आक्रमणकारी। धर्मबंधुओं यह राजपूतों पर नहीं, सारे हिन्दू धर्म पर हमला है। फ्रीडम ऑफ़ स्पीच जहाँ मुहम्मद के चित्र बनाने पर दम तोड़ देती है तब उसे आल्टरनेटिव व्यू के नाम पर हिन्दू इतिहास से छेड़छाड़ का कोई हक नहीं रह जाता। करणी सेना आप आगे बढ़ो और इन ख़िलजी की इन नाजायज औलादों से प्रतिशोध लो, सारा हिन्दू समाज साथ खड़ा हो।

कुलगौरव के लिए जौहर की ज्वालाओं में जलकर स्वाहा हुईं रानी पद्मिनी की कीर्ति गाथ अमर है और सदियों तक गौरवपूर्ण आत्म बलिदान की प्रेरणा प्रदान करती रहेगी। ऐसे पूर्वजों को हम नमन करते हैं।