अरबी टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड ने हिन्दुओं की माँ-बहनों के बलिदान मज़ाक बना दिया : केशर देवी

महारानी पद्मिनी संसार की अद्वितीय सुंदरी थीं, देश देशांतर में उनकी सुंदरता की कथाएं प्रिसिद्ध थी, जब अलाउद्दीन खिलजी ने यह बात सुनी तो सत्ता के मद में उसकी हवस जाग उठी और रानी पद्मिनी को पाने के लिए चित्तौड़ पर भारी सेना के साथ हमला बोल दिया, युद्ध महीनों चला पर राजपूतों के दुर्ग में पांव धरने में वह सफल न हुआ। इससे क्षुब्ध ख़िलजी ने कपट भरी चाल रची कि यदि राजा पद्मिनी का मुख भर दिखा दें तो वह दिल्ली लौट जाएगा। रतन सिंह और राजपूतों का खून खौल उठा, परन्तु स्वयं के कारण अनावश्यक रक्तपात न हो, आखिर विशाल सेना के सामने छोटी सी राजपूत सेना कब तक जूझती, चित्तौड़ की प्रजा की बर्बादी रोकने के लिए महारानी बोलीं कि उसे मेरा प्रतिबिम्ब दिखाने की अनुमति दी जा सकती है। कुटिल ख़िलजी इस बात पर मान गया। सुल्तान का राजसी आतिथ्य हुआ। रानी को आईने के सामने बिठाया गया। आईने से खिड़की के ज़रिये रानी के मुख की परछाई सरोवर के पानी में साफ़ पड़ती थी वहीं से अलाउद्दीन को रानी का मुखारविंद दिखाया गया। सरोवर के जल में रानी के मुख की छाया मात्र देखकर ख़िलजी की हवस ज्वाला बन गई, और उसने किसी भी कीमत पर पद्मिनी के हरण का निश्चय कर लिया। मलेच्छों को अपनी स्त्रियां दिखाएं यह राजपूती शान के खिलाफ है, असल में प्रतिबिम्ब भी एक दासी का ही दिखाया गया था। दुर्ग से लौटते समय ख़िलजी और उसकी तैयार सेना ने आक्रमण कर दिया और रतन सिंह को धोखे से बन्दी बना लिया। अलाउद्दीन ने पद्मिनी को पाने की कीमत पर ही राजा को छोड़ने की शर्त रखी।

राजपूत खेमा भड़क उठा, पर पद्मिनी के चाचा गोरा और भाई बादल ने गहरा षड्यंत्र रचा, शर्त स्वीकार ली गई कि आपके साथ जाने से पूर्व रानी राजा के दर्शन करेंगी, और सौइयों पालकियाँ सजाकर ख़िलजी के खेमे में पहुंचीं। पर पालकियों में राजपूत वीर बैठ गए और कहार भी सैनिकों को बनाया गया, पद्मिनी की पालकी में बैठा सुन्दर किशोर बादल। जब पालकी जांचने के लिए पर्दा उठाया गया तो बादल को कोई पहचान न सका। थोड़ी ही देर में म्यानों से तलवारें निकल गईं और जो भी शत्रु हाथ में आया, उसे मार डाला। इस अकस्मात आक्रमण से सुल्तान हक्का-बक्का रह गया। उसके सैनिक तितर-बितर हो गये और अपनी जानें बचाने के लिए यहाँ-वहाँ भागने लगे। रतन सिंह छुड़ा लिए गए। पर युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए गोरा मारा गया। असल में सुल्तान को भी रानी पद्मिनी का नहीं बल्कि एक दासी का प्रतिबिंब दिखाया गया था।

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