अरबी टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड ने हिन्दुओं की माँ-बहनों के बलिदान मज़ाक बना दिया : केशर देवी

 

ब्लॉग: केशर देवी (यूनाइटेड हिन्दी) :- स्कूल की बात है, स्कूल में जब कोई टीचर नहीं आते थे तो उनकी जगह टेम्परेरी टीचर कुछ दिन के लिए पढ़ाने आते थे। तब मैं सातवीं क्लास में थी और हमारी हिन्दी की मैम एक दो महीने के लिए बाहर गयीं थीं। उनकी जगह एक नीरज सर पढ़ाने आने लगे, टेम्परेरी टीचर्स अक्सर मस्त होते हैं, मज़े में पढ़ाते हैं। हम थे भी तब छोटे तो वो हमको कहानियाँ सुनाया करते थे, हम रोज उनके पीछे पड़ जाते सर कहानी, सर कहानी, अब उनको कोर्स भी कवर करना होता था तो हफ्ते में 2-3 कहानी तो सुनाते ही देते थे। जब वो कहानी सुनाते तो सारी क्लास चुपचाप सुनती, SUPW के पीरिएड भी वो ही ले लेते और हम कहानी सुनते रहते।

ज्यादातर वो इतिहास की बातें बताते, एक बार उन्होंने स्वामी विवेकानन्द की कहानी सुनाई, कैसे उन्होंने शून्य पर भाषण दिया, एक बार भानगढ़ के भूतों की और एक बार राजा हम्मीर की, एक बार भगत सिंह की और एक बार अक़बर के नवरत्नों की।

पर जिस कहानी ने हमें पूरी तरह झकझोर डाला था और कई साल तक क्लास के सब बच्चे उस कहानी की वजह से उनको याद करते रहे वो कहानी थी रानी पद्मिनी के जौहर की। क्लास में वीररस की वर्षा हो रही थी, शायद ही कोई ऐसा बच्चा था जिसके रोंगटे खड़े न हों। चित्तौड़ के किले की विश्वसुन्दरी रानी के सौंदर्य, उसके पति के अद्भुत पराक्रम, क्षत्रियों की विस्मयकारी रणनीति, आततायी ख़िलजी की नीचता और किले की हज़ारों वीरांगनाओं के भीषण जौहर की वह कहानी मेरे दिल में आज तक ज्यों की त्यों बनी हुई है। चित्तौड़ के किले की मिट्टी आज भी काली है, चित्तौड़ के किले से रात आठ बजे बाद आज भी मर्माहत चीखें सुनाई पड़ती हैं, यह सुनकर हम बच्चे अनुमान लगा पाते थे कि जिन्दा जलने का दर्द क्या होता है? पर बौद्धिक पशु यह नहीं समझ सकते कि क्यों उस फूल सी कोमल रानी ने अपनी सुंदरता समेत स्वयं को दावानल में झुलसा डाला था? क्यों किले की हज़ारों औरतें, बच्चे, बूढ़े आग के दरिया में हंसकर कूद पड़े? रतन सिंह, गोरा और बादल जैसे हज़ारों क्षत्रिय वीरों ने अपने प्राण युद्ध में बलिदान कर दिए?

मैं बचपन में सुनी उस कहानी को आज इसलिए लिख रही हूँ ताकि वेटिकन-अरब के टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड के जानवरों ने हिन्दुओं की माँ बहनों के साहस और बलिदान का भद्दा मज़ाक बना डाला है।

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