loading...

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ हुई उस तथाकथित घटना को 70 वर्ष हो चुके हैं, मगर उनके मौत और ज़िंदगी से जुड़े विवाद रुकने का नाम ही नहीं लेते. हालांकि अब उनकी ज़िंदगी से जुड़े 64 पत्र-पपत्रों को 18 सितंबर (शुक्रवार) को गुप्त सूची से बाहर कर दिया जाएगा. यहां कुछ फाइलों को सीएनएन आईबीएन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के हवाले से जनता हेतु आम कर दिया गया है. आप भी देखें…

क्या नेताजी जापान के भेदिया थे?

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू उनके विवादास्पद बयानों के लिए कुख्यात हैं. इधर हाल ही में उनका एक वक्तव्य आया है कि नेताजी वास्तविकता में ‘जापानी एजेंट’ थे. अब यह तो गंभीर आरोप है. काटजू इससे पहले रवीन्द्र नाथ टैगोर को भी अंग्रेजों का पिट्ठू कह चुके हैं.

loading...
Source: thecharnelhouse

काटजू कहते हैं कि, “ मेरी राय के अनुसार बोस एक अति महत्वाकांक्षी व्यक्ति थे, और वे जापन के एजेंट बन गए क्योंकि गांधी और हिटलर ने उन्हें कोई ‘भाव’ नहीं दिया”.

पूरी जानकारी के लिए Next पर क्लिक कर आगे बढ़े…. 

1 of 7
CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें