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Kargil

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भारत 17वां करगिल विजय दिवस मना रहा है। यह तारीख कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर हिंदुस्तानी फौज की फतेह की यादगार है।

26 जुलाई 1999 को जब भारतीय सेना ने करगिल को पाकिस्तानी फौज से आजाद कराकर अपनी सरजमीं पर तिरंगा लहराया था, तब ऐलान हुआ कि चाहे 1965 हो या 1971 या फिर 1999, जीत हिंदुस्तानी सेना के ही पाले में दर्ज होती रहेगी। सैनिक की शहादत का दिन भले मुकर्रर हो जाता है, लेकिन उसे याद करने की कोई पक्की तारीख नहीं होती।

देश जब अमन-सुकून की सांस ले रहा होता है, तब वक्त होता है उन जाबांज सैनिकों को शुक्रिया कहने का जिनकी साझा बहादुरी तिनका-तिनका जुटकर सरहदों पर और सीमाओं के अंदर देश की हिफाजत करती है।

लड़ाई में जीत खुद चलकर घर नहीं आती, सैनिक उसे हमारे लिए दुश्मन के हाथों से छीनकर लाते हैं। मिलिए उन हजारों नामों में से इन कुछ चेहरों से, जो इस करगिल विजय दिवस के विजय के हिस्सेदार हैं…

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योगेंद्र सिंह यादव

इन्हें करगिल युद्ध के दौरान अपनी बहादुरी के लिए भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से पुरस्कृत किया गया था।

यह सम्मान दिए जाते समय उनकी उम्र महज 19 साल थी। परमवीर चक्र पाने वाले वह सबसे युवा सैनिक हैं।

योगेंद्र का जन्म बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद अहिर गांव में 10 मई 1980 को हुआ। उनके पिता करण सिंह यादव सेना की कुमांऊ रेजिमेंट में थे। उन्होंने देश की ओर से 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लिया था…

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कैप्टन विक्रम बत्रा

शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को करगिल युद्ध में उनकी अविस्मरणीय वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र पर भारतीय सेना के इतिहास में सबसे कठिन माने जाने वाले ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए कैप्टन विक्रम बत्रा शहीद हो गए थे।

युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना आपस में जो संदेश भेजा करती थी, उनमें कैप्टन बत्रा को अक्सर ‘शेरशाह’ कहकर बुलाया जाता था…

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रायफलमैन संजय कुमार

संजय कुमार को उनकी वीरता और अप्रतिम शौर्य के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका जन्म हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में हुआ।

उन्होंने 3 बार सेना में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन किसी न किसी कारण से उनका आवेदन स्वीकार नहीं हो पाता था। चौथी बार आवेदन करने पर उन्हें सेना में शामिल कर लिया गया।
करगिल युद्ध में गोली लगने के कारण उनके शरीर से खून बह रहा था, लेकिन फिर भी उन्होंने एक पाकिस्तानी सैनिक की मशीन गन उठाई और दुश्मन के बंकर में घुस गए। हाथ से लड़ते हुए उन्होंने 3 दुश्मनों को मार गिराया। वह आज भी भारतीय सेना का हिस्सा हैं…

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मनोज कुमार पाण्डेय

कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय महज 24 साल की उम्र में करगिल युद्ध में शहीद हो गए थे।

वह गोरखा राइफल्स में थे। गोरखा रायफल्स अपनी वीरता और निडरता के कारण पूरी दुनिया में मशहूर है। मनोज को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

शहीद मनोज का जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में हुआ था…

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हवलदार चुनी लाल

हवलदार चुनी लाल जम्मू ऐंड कश्मीर पैदल सेना की 8वीं बटालियन के सैनिक थे। उनका जन्म जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में हुआ।

करगिल युद्ध में उनकी वीरता के लिए भारतीय सेना ने उन्हें वीर चक्र और सेना पदक से सम्मानित किया। चुनी लाल 24 जून 2007 को कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में आंतिकयों के साथ एक मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए।

जिस समय चुनी लाल शहीद हुए, उस समय वह नायब सूबेदार के पद पर थे। इस शहादत के बाद सेना ने उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया…

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कैप्टन अनुज नायर

7 जुलाई 1999 को करगिल युद्ध के दौरान लड़ते हुए कैप्टन अनुज नायर शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह भारतीय सेना का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है…

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