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क्‍या फिगर और बॉडी से ही जानते हैं लड़की को , यदि हां, तो फिर जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं आप..!

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वो देख यार क्या मस्त आइटम जा रही है। लड़की सुंदर है, मुझे पसंद है। वाऊ यार क्या फिगर है उसका। ये हैं महिलाओं को परखने के कुछ प्रचलित पैमाने। पहला तो सड़क छाप लड़कों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, दूसरा अक्सर शादी के लिए लड़की देखने आए लड़कों द्वारा और तीसरा संभ्रांत परिवार के पुरुषों का नज़रिया है। इसके अलावा भी महिलाओं को परखने के लिए बहुत से शब्दों, वाक्यों का इस्तेमाल होता होगा, मगर इसका पैमाना हमेशा देह ही होता है?

किसी की कमर, किसी की टांगे, किसी की आंखें, किसी का चेहरा, क्या औरतों को बस एक देह की तरह ही देखा जाना चाहिए, क्या इससे इतर उनकी कोई पहचान नहीं होती? क्या हम औरते देह से कभी ऊपर उठ पाएंगी? क्यों पुरुषों को नारी के आकर्षक शरीर के पीछे छुपा सुंदर मन व भावनाएं नहीं दिखती। आख़िर कब तक महिलाओं को महज़ एक वस्तु समझा जाता रहेगा।

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