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नई दिल्ली। पिछले साल तक ऐसा लग रहा था कि इस्लामिक स्टेट की बढ़ती ताकत को कम से कम पश्चिम एशिया में रोकना नामुमकिन ही हो जाएगा, लेकिन अब लगता है कि बगदादी और उसकी खूंखार सेना का दम निकलने वाला है। बगदादी का इतना बुरा वक्त आ गया है कि आतंकी भी अपने आका का साथ छोड़ने लगे हैं, क्योंकि खजाना खाली हो गया है और बगदादी कंगाली के कगार पर पहुंच गया है।hhhh

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अबु बकर अल बगदादी की तरफ से अपने लड़ाकों की सैलरी में कटौती का ये ऐलान इस्लामिक स्टेट ने करीब दो महीने पहले दिसंबर 2015 में किया था। इस्लामिक स्टेट के ऐलान में इस फैसले की वजह अचानक पैदा हुए मुश्किल हालात बताए गए थे। ये वो वक्त था जब पूरी दुनिया में फ्रांस पर हुए हमले को लेकर आईएसआईएस के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई जा रही थी। लेकिन खुद इस्लामिक स्टेट भी एक खतरे से जूझ रहा था। ये खतरा था इस्लामिक स्टेट के खजाने के लगातार खाली हो जाने का, जो आतंकी गुट साल 2014 में दुनिया के सबसे अमीर आतंकी संगठन के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा था वही 2015 के अंत में खजाना खाली होने से परेशान होने लगा। हालांकि अबु बकर अल बगदादी को लगता था कि इससे उसकी खौफ की हुकूमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए उसने बेधड़क अपने लड़ाकों की सैलरी कम करने का ऐलान कर दिया।

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