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ये है स्वतंत्रता के बाद भारतीय राज्यों के विलय की कहानी
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वर्ष 1947 में स्वतंत्र होने के बाद भारत 565 स्वतंत्र रियासतों में बंटा हुआ था। माउन्टबेटन ने जो प्रस्ताव भारत की आजादी को लेकर जवाहरलाल नेहरू के सामने रखा था, उसमें यह प्रावधान था कि भारत के 565 रजवाड़े भारत या पाकिस्तान में किसी एक में अपनी रियासत के विलय को चुनेंगे। इसमें एक प्रावधान यह भी था कि दोनों के साथ न जाकर ये रिसायत अपने को स्वतंत्र रख सकेंगे।

आज जो हम विशाल भारत की सूरत देखते हैं, वह सरदार वल्लभ भाई पटेल की रणनीतियों की वजह से संभव हो सका था। अगर ऐसा नहीं होता तो इस देश के कितने टुकड़े होते और भारत से अलग होकर कितने नए देश बनते यह कह पाना मुश्किल होता।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने चतुराई से भारत के हिस्से में आए रजवाड़ों को एक-एक करके विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बावजूद कुछ रजवाड़े भारत संघ मे मिलने से आनाकानी कर रहे थे।

आइए जानते है भारत के उन राज्यों के विलय की कहानी जो शुरुआत में भारत से अलग होने की मंशा रखते थे।

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