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आये दिन केंद्र में बैठी मोदी सरकार ऐसे-ऐसे कदम उठा रही है जिसे देख कर ऐसा लग रहा है कि अब जल्द ही आने वाले दिनों में अच्छे दिनों के सपनो को भी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह अब जुमला करार दे देंगे. अभी नोट बंदी के मुद्दे पर ना तो जनता शांत हुई है ना ही विपक्ष और इधर सरकार ने एक नया कदम उठा लिया.

खबर आ रही है कि भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने भगोड़ा घोषित कारोबारी विजय माल्या समेत 63 कर्जदारों का करीब सात हजार करोड़ रुपये का बकाया लोन को माफ़ करने वाली है और ऐसा इस लिए किया जा रहा है क्योंकि बैंक ने ऐसा मान लिया है कि इन कारोबारियों को दिया हुआ ये लों डूब चुका है. केंद्र में जो भी सरकार आती है वो बड़े-बड़े वादों के साथ आती है. ऐसे ही कई वादे भारतीय जनता पार्टी ने भी 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान किया था. लेकिन कही ना कही केंद्र सरकार अब अपने वादों से बिफरते नज़र आ रही है.

आमतौर पर अगर देखा जाये तो आम लोगों के लिए इन बैंको के कर वसूली के लिए कड़े प्रावधान होते है और किसी छोटे कारोबारी और गरीब किसान से कर वसूलने के लिए बैंक तीखे रुख अपनाती है. ऐसे में गरीब किसान के पास जान देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है. लेकिन बैंको के पास इन बड़े-बड़े बाकिदारों के लिए कोई रास्ता नहीं बचता है.

केवल माल्या ही नहीं साथ साथ कुल 63 बाकिदारों के कर्ज माफ़ किये गए है, पढ़ें अगले पेज पर…

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