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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली के लगातार शोर मचाने के बावजूद कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, साल 2015 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ख़राब रहा.

वित्तवर्ष 2015-16 के बजट में वित्त मंत्री ने जीडीपी वृद्धि दर का लक्ष्य 11.5 फ़ीसद रखा था, लेकिन वृद्धि केवल 5.2 फ़ीसद या लक्ष्य से 6.3 फ़ीसद कम रही. जिस 7.4 फ़ीसद की जीपीडी वृद्धि के बारे में वो शोर मचा रहे थे दरअसल उसमें 2.2 फ़ीसद की अपस्फ़ीति (डिफ़्लेशन) भी शामिल है.

सेबों की संतरे से तुलना कर कुछ लोगों को कुछ समय के लिए तो मूर्ख बनाया जा सकता है, सभी लोगों को हमेशा के लिए नहीं.

कहावत है कि हाथ कंगन को आरसी क्या… अर्थव्यवस्था उसमें लाभ के लिए लगाए गए पैसे से बढ़ती है. आर्थिक गतिविधियों का सबसे भरोसेमंद संकेत शायद बैंकों से कर्ज़ों का वितरण है. लेकिन इसके लक्षण बहुत अच्छे नहीं हैं.

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