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ऑपरेशन सद्‍भावना: सेना की प्रशंसनीय मुहिम, जिस पर मीडिया कभी बात नहीं करती
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youthkiawaaz
अगर आप बिकाऊ मीडिया के पुजारी हैं, जिनकी समझ में भारतीय सेना की भूमिका जम्मू-कश्मीर में खौफनाक है और टीआरपी के लिए वह जो कुछ भी परोस देते हैं और आप बड़ी सहजता से यह हज़म कर जाते हैं कि भारतीय सेना वहां अत्याचार करती है, तो कृपया यह लेख न पढ़े।

जम्मू-कश्मीर में अभी कुछ दिन पहले जो कुछ भी घटित हुआ है, वह मीडिया पर छाया रहा है। मीडिया ने यहां तक इस अफवाह पर जम कर टीआरपी की रोटिया सेंकी कि एक जवान ने एक स्कूली छात्रा के साथ छेड़छाड़ की है, जिसके बाद से वहां के हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। जबकि इस मामले में कथित रूप से पीड़ित लड़की बाकायदा मजिस्ट्रेट के सामने सेना के पक्ष में बयान भी दे चुकी है।

समझ से परे है कि मीडिया इस पक्ष को क्यों नहीं दिखाती कि इन सब के पीछे अलगावादियों का हाथ हैं। और इनकी मांग है कि यहां पर लागू ‘अफस्पा’ को हटाया जाए।

दरअसल, अलगाववादी कश्मीर में भारतीय सेना को बदनाम करने का पाकिस्तानी एजेंडा चलाते हैं और ऐसी झूठी अफवाहें फैलाकर कश्मीर के आम लोगों को भारतीय सेना के खिलाफ भड़काते हैं। पिछले कुछ सालों में ऐसी तमाम अफवाहें, चाहे पानी में ज़हर मिलाने की घटना हो, या वहां के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत की झूठी खबर हो, इन अलगाववादियों ने भारतीय सेना को हमेशा ही बदनाम करने की कोशिश की है।

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स्रोतhttp://topyaps.com/
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