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नई दिल्ली- मणिपुर में भारतीय सैनिकों पर हुए हमलों के बाद सेना ने म्यांमार की सीमा में घुसकर कई आतंकियों को न सिर्फ ढेर कर दिया, बल्कि उनके ट्रेनिंग कैंप भी तबाह कर दिए। सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार ने अब भारतीय सेना को किसी भी देश में ऐसी ही कार्रवाई (तकनीकी भाषा में सर्जिकल स्ट्राइक) के लिए हरी झंडी दे दी है। गुरुवार को गृह मंत्रालय में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला किया गया। सर्जिकल स्ट्राइक के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करने का जिम्मा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को दिया गया है। वे म्यांमार में भी सेना के अगले ऑपरेशन की योजना बनाने के लिए ने पी तॉ का दौरा करने वाले हैं।

बैठक में क्या तय हुआ

गुरुवार को गृह मंत्रालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, खुफिया एजेंसियों के प्रमुख और सेना के आला अधिकारी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, इसमें तय किया गया कि आतंकियों के खिलाफ हर हाल में जवाबी कार्रवाई की जाएगी, भले ही आतंकी किसी भी देश की सीमा में जा छुपें। अगर आतंकी हमले के बाद दूसरे देश में जाकर शरण लेंगे, तो वहां सर्जिकल ऑपरेशन किया जाएगा। सबसे ज्यादा आतंकी पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) में शरण लिए हुए हैं। बैठक के बाद एनएसए अजित डोभाल म्यांमार रवाना हो गए।

16 या 18 जून को म्यांमार जा सकते हैं डोभाल

पूर्वोत्तर के आतंकियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का खाका तैयार करने के मकसद से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 16 या 18 जून को म्यांमार जा सकते हैं। इस यात्रा के दौरान वे म्यांमार की खुफिया एजेंसियों के साथ बैठक कर उग्रवादियों के कमांडरों और उनके कैंपों के बारे में चर्चा करेंगे। बता दें कि पिछले साल मई में ही म्यांमार के साथ भारत ने सुरक्षा समझौता किया था। इसके तहत दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति बनी थी। जून से इस समझौते पर अमल शुरू हो चुका था।

क्या म्यांमार पर डोभाल के फोकस की ये हैं 3 वजहें?

1. घुसपैठिए
मणिपुर में 4 जून को 18 सैनिकों की शहादत का बदला लेने के लिए सेना की जवाबी कार्रवाई के बाद पूर्वोत्तर के आतंकी बौखला गए हैं। वे सीमा पार कर दोबारा हमला करने की फिराक में हैं। इसी वजह से पूर्वोत्तर के राज्यों को गुरुवार से हाई अलर्ट पर रखा गया है। भारत इन आतंकियों को निष्क्रिय करने के लिए आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

2. एनएससीएन
एनएससीएन-के, पीएलए और उल्फा के जो 20 से ज्यादा आतंकी भारत में घुसपैठ की फिराक में हैं, उनमें सबसे ज्यादा खतरा एनएससीएन-के यानी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (खपलांग) से है। मणिपुर में 4 जून के हमले के पीछे यही संगठन था। यह पूर्वोत्तर के बाकी उग्रवादी गुटों के साथ मिलकर पहले भी हिंसा कर चुका है। इससे करीब 2000 उग्रवादी जुड़े हैं। मणिपुर के चंदेल सहित पहाड़ी इलाकों में भी इस संगठन की पैठ है। इसकी केंद्र सरकार के साथ शांति वार्ता विफल हो चुकी है।

3. तालिबान
म्यांमार में 13 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं। तालिबान लंबे वक्त से इन मुस्लिमों को जिहाद के लिए भड़का रहा है। भारतीय सेना की म्यांमार में कार्रवाई से एक दिन पहले 8 जून को पाकिस्तानी तालिबान ने म्यांमार में जिहाद शुरू करने की बात कही थी। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के एक धड़े जमात-उल-अरहर के प्रवक्ता एहसानउल्लाह एहसान ने पाकिस्तान से दिए बयान में कहा था कि रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए हम म्यांमार में ट्रेनिंग सेंटर बनाएंगे।

क्या इस स्ट्रैटजी पर काम करते हैं डोभाल?

मोदी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने से तीन महीने पहले फरवरी 2014 में अजीत डोभाल ने नानी पालखीवाला मेमोरियल लेक्चर में बताया था कि देश की सुरक्षा के लिए तीन तरह की स्ट्रैटजी पर काम होना चाहिए – डिफेंसिंग, डिफेंसिंव-ऑफेंस और ऑफेंसिव। जानिए, पिछले एक साल में सुरक्षा के प्रति देश की नीति में यह स्ट्रैटजी कैसे दिखाई दी-

1. डिफेंसिव : लोकसभा चुनाव के बाद जून 2014 से पाकिस्तान ने एलओसी पर फायरिंग तेज कर दी। जवाब में भारत भी डिफेंसिव फायरिंग करता रहा। भारत ने दुनिया को यह संदेश देने की पूरी कोशिश की कि वह अपनी तरफ से संयम बरत रहा है।

2. डिफेंसिव-ऑफेंस : जब पाकिस्तान ने अक्टूबर में एलओसी पर संघर्षविराम का उल्लंघन किया तो भारत ने भी गोलीबारी तेज कर दी। बताया जाता है कि इस रणनीति के पीछे भी डोभाल का ही दिमाग था। केंद्र ने इस बारे में खुलकर कुछ नहीं बताया। लेकिन पाकिस्तान सकते में आ गया। इसका उदाहरण इस बात से मिलता है कि भारी गोलीबारी झेल रहे पाकिस्तान ने अपनी तरफ हो रहे नुकसान का कवरेज कर रहे मीडिया पर तुरंत रोक लगवा दी। अाईएसआई ने पाकिस्तानी चैनलों से कहा कि वे अगले आदेश तक एलओसी के नजदीक हो रहे नुकसान का कोई भी फुटेज नहीं दिखाएंगे।

3. ऑफेंसिव : 4 जून को मणिपुर में पूर्वोत्तर के आतंकियों के हमले के बाद महज 5 दिन के अंदर भारतीय सेना ने म्यांमार सीमा के अंदर प्रवेश कर जवाबी कार्रवाई की। बाद में पाकिस्तान को कड़ा संदेश भेजने के लिए 4 मंत्रियों ने आक्रामक बयान दिए। घबराए पाकिस्तान ने जवाबी बयानबाजी की। इस तरह पाकिस्तान ने खुद ही दुनिया को बता दिया कि भारत के अगले निशाने पर वही है।

डोभाल के तजुर्बे का आर्मी को मिल रहा फायदा
1968 की केरल बैच के आईपीएस अफसर अजीत डोभाल 6 साल पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट रहे हैं। वे पाकिस्तान में बोली जाने वाली उर्दू सहित कई देशों की भाषाएं जानते हैं। एनएसए बनने के बाद वे सभी खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों से दिन में 10 बार से ज्यादा बात करते हैं। उनकी सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मणिपुर में हमले के बाद डोभाल ने पीएम के साथ बांग्लादेश दौरा ऐन वक्त पर रद्द कर दिया था। डोभाल मणिपुर में इंटेलिजेंस इनपुट्स पर नजर रख रहे थे। डोभाल जब आईबी में थे, तब उन्हें 1986 में पूर्वोत्तर में उग्रवादियों के खिलाफ खुफिया अभियान चलाने का अनुभव है। उनका अंडरकवर ऑपरेशन इतना जबर्दस्त था कि लालडेंगा उग्रवादी समूह के 7 में से 6 कमांडरों को उन्होंने भारत के पक्ष में कर लिया था। बाकी उग्रवादियों को भी मजबूर होकर भारत के साथ शांति समझौता करना पड़ा था।

खालिस्तानी आतंकियों पर कार्रवाई में भी डोभाल ने ही दिए थे इनपुट
ऑपरेशन ब्लूस्टार के 4 साल बाद 1988 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में एक और अभियान ऑपरेशन ब्लैक थंडर को अंजाम दिया गया। मंदिर के अंदर दोबारा कुछ आतंकी छिप गए थे। डोभाल वहां रिक्शा चालक बनकर पहुंचे थे। कई दिनों तक आतंकियों ने उन पर नजर रखी और एक दिन बुला लिया। बताया जाता है कि डोभाल ने आतंकियों को भरोसा दिलाया कि वे आईएसआई एजेंट हैं और मदद के लिए आए हैं। डोभाल एक दिन स्वर्ण मंदिर के पहुंचे और आतंकियों की संख्या, उनके पास मौजूद हथियार और बाकी चीजों का मुआयना किया। उन्होंने बाद में पंजाब पुलिस को बाकायदा नक्शा बनाकर दिया। दो दिन बाद ऑपरेशन शुरू हुआ और आतंकियों को बाहर किया गया। इस ऑपरेशन में डोभाल की भूमिका के चलते उन्हें देश के दूसरे बड़े वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से नवाजा गया। 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान को जब अगवा कर कंधार ले जाया गया था तब यात्रियों की रिहाई की कोशिशों के पीछे डोवाल का ही दिमाग था।

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