वाशिंगटन पोस्ट ने शलभ कुमार पर छापी ‘गलत’ खबर, भारतीय-अमेरिकी खफा

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कुमार ने कहा था कि अमेरिका और भारत के बीच गहरा संबंध पहले ही ‘‘इस्लामी’’ चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई को काफी आगे बढ़ा रहा है।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आव्रजन से संबंधित नए आदेश पर हिंदू-अमेरिकी समुदाय बंटा हुआ था। समुदाय के कुछ लोग इस आदेश को ‘पूरी तरह से गैरकानूनी’ बता रहे थे तो अन्य उन राष्ट्रों की सूची में पाकिस्तान और सऊदी अरब को भी शामिल करने की मांग कर रहे थे। चुनाव के दौरान ट्रंप के लिए प्रचार करने वाले रिपब्लिकन हिंदू कोअलिशन (आरएचसी) ने राष्ट्रपति के शासकीय आदेश को पूरा समर्थन देने की घोषणा की थी। आरएचसी के अध्यक्ष शलभ कुमार ने कहा था कि ‘इस्लामी आतंकवाद से नागरिकों की रक्षा के लिए उठाए गए ट्रंप प्रशासन के निर्णायक कदम की हम सराहना करते हैं।’ आरएचसी बोर्ड सदस्यों ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और सऊदी अरब को भी उन मुस्लिम बहुल सात देशों ईरान, इराक, लीबिया, सीरिया, सोमालिया, सूडान और यमन की सूची में शामिल करने की मांग की थी जिनके नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।

वहीं अमेरिका के जाने-माने दानदाता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक भारतवंशी शलभ कुमार ने यूएस में काम करने वाले भारतीयों में एच-1 बी वीजा के प्रति भय खत्म करते हुए दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से निकट भविष्य में एच-1 बी वीजा को लेकर किसी कार्यकारी आदेश को मंजूरी देने की योजना नहीं है।

शिकागो स्थित रिपब्लिकन हिंदू गठबंधन के प्रमुख शलभ कुमार ने पत्रकारों से कहा था कि – ‘अमेरिका में अभी और एच-1 बी वीजा जारी किए जाने की जरूरत होगी। भारत से इस वीजा पर अमेरिका में जितने लोग हैं, उस संख्या में निकट भविष्य में इजाफा होगा।’

उन्होंने कहा था कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था के विकास में आईटी सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। शलभ कुमार ने कहा था कि अमेरिका में फिलहाल आईटी कर्मचारियों की खासी कमी है और इसे भारतीय आईटी पेशेवरों द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि ट्रंप प्रशासन की ओर से एच-1 बी वीजा का दुरुपयोग व धोखाधड़ी रोकने के प्रयास जरूर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि व्हाइट हाउस द्वारा प्रत्येक देश का ग्रीन कार्ड कोटा कम करने का फैसला लिया जा सकता है। इसके तहत व्यक्ति को अमेरिका का वैध स्थायी नागरिक बनने का अधिकार मिलता है।