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नई दिल्ली; दुनिया के बड़े देशों में सबसे तेज जीडीपी ग्रोथ वाले देश की भारत की पहचान इस फाइनैंशल इयर में और पक्की होगी, भले ही दिसंबर 2015 क्वॉर्टर में आर्थिक तरक्की की रफ्तार कुछ धीमी रही है। इससे नरेंद्र मोदी सरकार का हौसला बढ़ेगा, जिसकी इकनॉमिक रिकवरी तेज करने के लिए पूरे मन से कोशिश नहीं करने को लेकर आलोचना हो रही है।india

सीएसओ के डेटा के मुताबिक, फाइनैंशल इयर 2016 में जीडीपी ग्रोथ 7.6 पर्सेंट रह सकती है। यह 2015 में 7.2 पर्सेंट थी। दिसंबर क्वॉर्टर में ग्रोथ 7.3 पर्सेंट रही, जबकि मार्च क्वॉर्टर की ग्रोथ को संशोधित करके बढ़ाया गया है। इसलिए 2016 में आर्थिक तरक्की की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। मार्च क्वॉर्टर की ग्रोथ को संशोधित करके 7 पर्सेंट से 7.6 पर्सेंट कर दिया गया है। वहीं, सितंबर तिमाही की ग्रोथ पहले 7.4 पर्सेंट बताई गई थी, जिसे अब 7.6 पर्सेंट किया गया है।

सरकार का कहना है कि शुरुआती अनुमानों में इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में जोरदार बढ़ोतरी को शामिल नहीं किया गया था। इसलिए जीपीडी डेटा को अब सुधारा गया है। इकनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी शक्तिकांत दास ने बताया, ‘जीडीपी डेटा की दिशा पॉजिटिव है। सरकार ने पिछले डेढ़ साल में जो नई नीतियां बनाई हैं और रिफॉर्म किए हैं, उनका फायदा अब अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।’

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