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न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) की सदस्यता भारत के लिए जरूरत बन गई है। इस मामले में नरेन्द्र मोदी की सरकार की असली परीक्षा 9-10 जून को होगी, जब ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में इस समूह की बैठक होगी।

eमुख्य रूप से चीन की आपत्ति की वजह से भारत को NSG की सदस्यता नहीं मिल रही है। चीन की मांग है कि पाकिस्तान की इस समूह की सदस्यता दिलाने की जरूरत है।

हालांकि, ऑस्ट्रिया, न्यूजीलैन्ड और आयरलैन्ड सरीखे देशों का भी मानना है कि भारत को इस समूह में अभी शामिल किए जाने की जरूरत नहीं है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समूह के चार प्रमुख देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रान्स और रूस भारत को इसकी सदस्यता दिलाने के लिए तैयार हैं।

fयह ग्रुप 1974 में भारत के पहले एटमी टेस्ट के बाद एटमी टैक्नॉलजी पर कंट्रोल रखने के लिए बना था। इस वक्त 48 देश इसके सदस्य हैं। ग्रुप में शामिल होने के लिए भारत ने अपना आवेदन 12 मई 2016 को ही दाखिल कर दिया था, ताकि उसे अधिक परमाणु ऊर्जा हासिल हो सके।

बदलते दौर में तेजी से विकास के लिए NSG की सदस्यता भारत की जरूरत बन गया है। यहां रहे 10 कारण।

1. NSG में शामिल होने के बाद भारत कानूनी रूप से परमाणु हथियार संपन्न देश बन जाएगा।

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2. भविष्य में किसी परमाणु परीक्षण के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकेगा।

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3. भारत को उन्नत परमाणु तकनीक और अत्याधुनिक हथियार प्राप्त हो सकेंगे।

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4. भारत में ऊर्जा का संकट पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

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5. भारत एक कद्दावर व्यवस्था माना जाएगा।

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6. दक्षिण एशिया में भारत का कद बढ़ेगा, क्योंकि वह चीन के विरोध के बावजूद इस समूह में शामिल होगा।

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7. सदस्यता मिलने से भारत को परमाणु मसलों पर मिलेगा वीटो का अधिकार।

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8. नए सदस्यों के मसले पर भारत की सहमति जरूरी होगी।

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9. दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन।

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10. बिना शर्त यूरेनियम लेने की आजादी। 

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