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शिंगणापुर. महान भारत देश में हाल तक जो व्यवहार दलितों के साथ होता था वहीं प्रसिद्ध शनि धाम शनि शिंगणापुर मंदिर में एक युवती के साथ हुआ. शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं की पूजा-अर्चना करना निषेध है. ऐसे में एक युवती ने शनि भगवान की पूजा कर ली तो समूचे शिंगणापुर में बवाल मच गया.

शनिवार की दोपहर में जब शनि शिंगणापुर मंदिर परिसर में हजारों लोग जमा थे और सुरक्षा के पूरे इंतजाम थे, ऐसे में भीड़ में से एक युवती अचानक मंदिर पर चढ़ी और वहां जाकर उसने शनि भगवान की पूजा की. युवती द्वारा पूजा किए जाने से हड़कंप मच गया और देखते ही देखते स्थानीय निवासी उग्र हो गए.

मंदिर के प्रवक्ता ने कहा कि एक महिला द्वारा शनि शिंगणापुर मंदिर में पूजा करने की घटना के बाद हम मूर्ति का शुद्धिकरण कर रहे हैं. महिला द्वारा पूजा किए जाने से हिन्दू धर्म और लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं.

उन्होंने कहा, हम सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा को हर कीमत पर कायम रखना चाहते हैं. जब हम खुद पूजा नहीं कर सकते, ऐसे में एक महिला सुरक्षा व्यवस्था का घेरा तोड़कर कैसे पूजा कर सकती है?

घटना के बाद मंदिर की सुरक्षा में लगे 7 सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया गया. शनि शिंगणापुर मंदिर का शुद्धिकरण किया गया. रविवार को सुबह 11 बजे तक पूरा शिंगणापुर बंद रहा. लोगों ने विरोधस्वरूप अपनी दुकानें नहीं खोलीं, होटलें भी बंद रहीं.

महिलाओं द्वारा शनि पूजा न करने की यह परंपरा 400 वर्ष पुरानी है, ऐसे में युवती द्वारा पूजा करने से स्थानीय लोगों में काफी रोष है.

शनि शिंगणापुर मंदिर के प्रवक्ता साईंराम बांकर ने कहा कि महिलाओं द्वारा शनि भगवान की पूजा करने की मनाही है. बांबे हाईकोर्ट ने भी माना है कि इस परंपरा के निर्वहन में कोई दिक्कत नहीं है.

स्थानीय लोगों ने एक सभा का आयोजन करके अपना आक्रोश प्रकट करने के साथ ही साथ निंदा प्रस्ताव भी रखा. उन्होंने कहा कि हमने आज अपना कारोबार बंद करके विरोध जाहिर किया है. भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए कड़े प्रबंध करने की आवश्यकता है.

ऐसे में बहस शुरू हो गई है कि आखिर क्यों महिलाएं शनि भगवान की पूजा नहीं कर सकतीं? 15 साल पहले भी शनि मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर बैन का विरोध हुआ था. तब जाने-माने रंगकर्मी डॉ. श्रीराम लागू भी महिलाओं के पक्ष में मुहिम से जुड़े थे.

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की सदस्य रंजना गवांदे ने कहा कि महिला की हिम्मत का हम स्वागत करते हैं. जब देश में महिला-पुरुषों को बराबरी हासिल है तो कई मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी क्यों है? शनि शिंगणापुर में यह क्रांतिकारी घटना हुई है. इस पर राजनीति न हो और मंदिर को महिलाओं के लिए खोला जाए.

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