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गाज़ियाबाद: शौहर ने फोन पर बीवी को तलाक दे दिया, लेकिन अब उसे अपनी गलती पर पछतावा है । वह बीवी को दोबारा से साथ रखना चाहता है, लेकिन शरीयत तौर पर वह ऐसा तभी कर सकता है, जब उसकी बीवी दूसरे मर्द से शादी करे, और सुहागरात मनाये । इसके बाद फिर दूसरा शौहर उसे तलाक दे । इसे हलाला कहते है ।640x392_21929_77466

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अब दोनों को दोबारा साथ रहने के लिए हलाला प्रक्रिया से गुजरना होगा। काफ़ी जद्दोजहद के बाद सोमवार को दोनों ऐसा करने के लिए राज़ी हो गए । अब महिला एक रात के लिए अपने देवर से शादी करेगी । अगले दिन वह उसे तलाक देगा । इसके बाद पहले वाले शौहर से उसका फिर से निकाह हो जायेगा ।

यह मामला महिला थाने में आया हुआ था । महिला खोड़ा कालोनी की रहने वाली है, उसकी शादी धौलाना में अगस्त 2013 में हुई थी । पाँच माह पहले अनबन होने पर महिला मायके चली गयी। शौहर ने उसे फोन पर तीन बार तलाक तलाक तलाक कह कर निकाह ख़त्म कर दिया ।

पिछले महीने महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की । महिला थाने में दोनों परिवारो की काउंसलिंग हुई तो तलाक की बात सामने आई । सोमवार को दोनों पक्ष एक बार फिर साथ रहने को तैयार हो गए । लेकिन शरीयत का पेंच आड़े आ गया । महिला इसके लिए राजी नही थी लेकिन अपनी शादी बचाने के लिए उसे ऐसा करना पड़ेगा । दूसरी तरफ शौहर का कहना है कि वह शर्मिंदा है उसे तलाक नही देना चाहिए था । हलाला उसके लिए भी किसी सजा से कम नही । वही मौलाना अरशद खालिद का कहना है कि शरीयत में हलाला इसलिए जरुरी है ताकि कोई बात-बात पर तलाक ना दे । शादी जैसे बड़े रिश्ते को मामूली ना समझे ।

महिला थाना इंचार्ज अंजू तेवतिया ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्ष शरीयत तरीके से हलाला करके फिर से निकाह को राजी हो गए है ।

लेकिन सवाल उठता है कि आज के इस आधुनिक युग में हलाला जैसे रिवाज़ क्यों ? महिला की क्या गलती जो उस पर इस तरह का बेहूदा और शर्मनाक रिवाज़ थोपा जाये ?

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