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धर्म के तथाकथित रक्षक न केवल उसकी ताकत पर सवाल खड़ा करते हैं बल्कि उस इंसानी अहंकार को भी दिखाते हैं जो अपने धर्म से जुड़ी मानवेत्तर सत्ता की मान रक्षा का दावा करता है? IslamStoryIllustration--800x400

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पिछले सप्ताह केरल के कन्नूर जिले के तालिपाराम्बा में आर रफीक का स्टूडियो जला दिया गया. वे एक वीडियोग्राफर हैं. स्टूडियो पर हमले की यह वारदात रफीक के मुताबिक़ सार्वजनिक स्थलों पर बुर्के के दुरुपयोग को लेकर एक सीमित व्हाट्स एप समूह( इस्लाम क्या है?) के भीतर उनकी एक टिप्पणी के बाद हुई. उन्होंने कहा था कि पिछले दिनों ऐसी कई घटनाओं की रिपोर्ट आई है कि बुर्काधारी औरतें शादियों और गहनों की दुकानों में चोरियां कर रही हैं. रफीक ने कहा कि इसके पीछे ज़रूर कोई संगठित गिरोह है जो बुर्के की आड़ में चोरी का धंधा कर रहा है. उनका सुझाव था कि सार्वजनिक स्थलों पर औरतों को बुर्के या हिजाब का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए ताकि इस गिरोह का पर्दाफ़ाश हो सके.

रफीक एक बहुत सीमित – चोरी के – सन्दर्भ में एक सुझाव रख रहे थे. वे किसी इस्लामी रिवायत पर तो कोई बहस कर ही नहीं रहे थे. लेकिन इस टिप्पणी के बाद उन्हें धमकियां मिलने लगीं. उनके स्टूडियो के और खुद उनके बहिष्कार का आह्वान किया जाने लगा. ये धमकियां केरल के भीतर से तो आईं ही, खाड़ी के मुल्कों से भी आईं, ऐसा रफीक का आरोप है जिन्होंने पुलिस को कई धमकियां देने वालों के फोन नंबर सौंपे हैं.

इस्लाम के मुहाफ़िज़ों के गिरोह उसके भीतर किसी विचार-विमर्श की संभावना को ऐसे हमलों से खत्म कर रहे हैं और इस तरह उसे एक जीवित धार्मिक परंपरा के गौरव से वंचित करके रूढ़ियों के एक सिलसिले में शेष कर रहे हैं

फिर शनिवार की रात या इतवार की सुबह उनके स्टूडियो पर हमला हुआ और उसे बर्बाद कर दिया गया. यह हमला किसने किया, यह तो ठीक-ठीक पुलिस की तहकीकात से मालूम होगा लेकिन रफीक और अनेक लोगों का खयाल है कि यह केरल के किसी इस्लामी कट्टरपंथी समूह का ही काम है.

रफीक एक बहुत ही सीमित और करीबी लोगों के समूह में अपनी बात रख रहे थे. जब तक उस व्हाट्स एप समूह में से किसी ने यह बात बाहर न की हो, इसका औरों तक पहुंचना मुमकिन न था. और अगर उसी समूह के भीतर के किसी ने उनपर हमला किया या करवाया तो यह और भी भयानक बात है. इसका एक अर्थ यह भी है कि अब कुछ चीजों पर किसी के साथ भी संवाद संभव नहीं है.

इस हमले से हाल के एक दूसरे हाल ही के वाकए की याद आना अस्वाभाविक नहीं है. यह वाकया प्रसिद्ध मलयाली अखबार माध्यमम की पत्रकार वीपी राजीना की फेसबुक पर की गई टिप्पणी के बाद उनपर हुए हमले का है. यह शारीरिक हमला न था लेकिन उनपर गालियों और धमकियों की बौछार कर दी गई, उनके फेसबुक खाते में सेंध लगाई गई और फिर उसे बंद करवा दिया गया. राजीना ने उस टिप्पणी में अपने एक अनुभव के सहारे मदरसों में बच्चों के यौन शोषण की चर्चा की थी.

राजीना पर जब इस्लाम की हतक का आरोप लगाया गया तो उन्होंने लिखा कि क्या इस्लाम इतना कमजोर है कि बच्चों का यौन शोषण करनेवालों को बचाने की बात करता है?

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