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पुराणों में वर्णित पुनर्जन्म की कथा – 3

जुआरी से राजा बलि कैसे हुआ?

प्राचीन काल में देवब्राह्मण नियंक एक प्रसिद्ध जुआरी था। वह महापापी तथा व्यभिचार आदि अन्य दुर्गुणों से भी दूषित था। एक दिन कपटपूर्वक जुए में उसने बहुत धन जीता। फिर अपने हाथों से पान का स्वस्तिकाकार बीड़ा बनाकर तथा गन्ध और माला आदि सामग्री लेकर एक वेश्या को भेंट देने के लिए वह उसके घर की ओर दौड़ा। रास्ते में पैर लड़खड़ाए। पृथ्वी पर गिरा और मूर्च्छित हो गया। जब होश आया, तब उसे बड़ा खेद और वैराग्य हुआ। उसने अपनी सामग्री बड़े शुद्ध चित्त से वहीं पड़े हुए एक शिवलिंग को समर्पित कर दी। बस, जीवन में उसके द्वारा यह एक ही पुण्यकर्म सम्पन्न हुआ।

कालांतर में उसकी मृत्यु हुई। यमदूत उसे यमलोक ले गए।

यमराज बोले – ‘ओ मूर्ख! तू अपने पाप के कारण बड़े-बड़े नरकों में यातना भोगने योग्य है’ । उसने कहा – ‘महाराज! यदि मेरा कोई पुण्य भी हो तो उसका विचार कर लीजिए।’ चित्रगुप्त ने कहा – ‘तुमने मरने के पूर्व थोड़ा-सा गंधमात्र भगवान शंकर को अर्पित किया है। इसके फलस्वरूप तुम्हें तीन घड़ी तक स्वर्ग का शासन-इन्द्र का सिंहासन प्राप्त होगा।’ जुआरी ने कहा-‘तब कृपया मुझे पहले पुण्य का ही फल प्राप्त कराया जाय।’

                      आगे पढ़े >> लेख आगे भी जारी है…. 

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