loading...

123944992

loading...
नई दिल्ली- क्या आप कण्डोम का इतिहास जानते हैं? इस सवाल पर जवाब देना उतना ही मुश्किल होगा, जितना आसान कण्डोम का इस्तेमाल करना। लेकिन कण्डोम का अतीत साढ़े चार सौ साल पुराना है। इतिहास के पन्नों में दर्ज कण्डोम के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। कण्डोम का इतिहास गोल्डेन पीरियड की तरह था। उस दौर में एक कण्डोम को जितनी बार चाहे इस्तेमाल कर सकते थे। आज अव्वल दर्जे के कण्डोम भी यह काबिलियत नहीं रखते। कण्डोम का इतिहास देखने पर पता चलता है कि इटली के भौतिक विज्ञानी गेब्रियल फेलोपियस ने साल 1564 में पहली बार कण्डोम जैसी चीज को इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।

कण्डोम का इतिहास

गेब्रियल ने ऐसी लिनेन की परत का इस्तेमाल करने की पैरोकारी की, जिसमें सोखने की क्षमता हो। साथ ही साथ यह सिफलिस जैसी बीमारियों से भी बचाता हो। असुरक्षित यौन संक्रमण से सिफलिस होने का खतरा रहता है। इस स्थिति में पीडि़त का शरीर धब्बेदार होता जाता है और धीरे-धीरे गलने लगता है।

इसके बाद साल 1605 में कैथोलिक पादरी लियोनार्डस लेसिअस ने कण्डोम के इस्तेमाल को वैध घोषित किया था। हालांकि उस दौर में कैथोलिक चर्चों ने उनकी बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी।

सन् 1600 में पहली बार कण्डोम का इस्तेमाल नए तरीके से किया गया। यह कण्डोम जानवरों की अतडि़यों से बना था। इसकी खूबी थी कि चाहे जितनी बार इस्तेमाल करिए, यह खराब नहीं होगा। हालांकि इसकी कीमत काफी ज्यादा हुआ करती थी।

किताबों में कण्डोम का इतिहास खोजने पर पहली बार इसका इस्तेमाल सन् 1839 में देखने को मिला। चार्ल्स गुडवियर ने पहली बार रबर कण्डोम का आविष्‍कार किया। आप उन्हें कण्डोम का जनम भी मान सकते हैं।

इसके बाद सन् 1919 में पहला लेटेक्स कण्डोम बनाया गया। इसे फ्रेडरिक कीलियन ने बनाया। साल गुजरे और वक्त बदला। कण्डोम का प्रचलन बढ़ने लगा। 1931 में अमेरिकी आर्मी में कण्डोम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। एक दौर आया, जब आर्मी में किसी के पास कण्डोम होने से उसकी ऊंची हैसियत का पता चलता था।

यही वह वक्त था, जब कण्डोम पर पहली बार एड भी बने। यह एड हालांकि किसी टीवी या रेडियो पर नहीं सुनने को मिलते थे। आमी के लोगों के बीच यह एड काफी प्रचलित था। आप भी इसे पढ़ना चाहेंगे… हाजिर है- “Don’t forget, put it on before you put it in.”

1 of 2
CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें