आप सभी को नववर्ष एवं नवरात्र मंगलमय हो। धर्मो रक्षति रक्षितः।

भारतीय एवं हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएं यह नव वर्ष आपके जीवन में खुशियां सुख समृद्धि एवं आनंद लेकर आए और आपके जीवन को प्रसन्नता से भर दे आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो…..

Yashark Pandey : चैत्र प्रतिपदा आज से है या कल से ये मुझे नहीं पता। कुछ विद्वानों को पढ़ा किंतु समझ में नहीं आया। प्रायः अखबार में खबर आती है कि काशी के फलां फलां विद्वानों की बैठक होने वाली है जिसमें पूरे देश में एक पंचांग की व्यवस्था करने पर विचार होगा। ऐसी बैठकों में विमर्श से क्या निष्कर्ष निकलता है पता नहीं। ज्योतिष अपना विषय नहीं है अतः कुछ और कहना उचित नहीं।

अत्रि विक्रमार्क अन्तर्वेदी जी की आईडी बन्द है अन्यथा डांट डपट के कुछ ज्ञान दे ही देते। मांस हम खाते नहीं तो नवरात्र में छोड़ने का प्रश्न भी नहीं उठता। जीव जन्तु herbivore, carnivore और omnivore होते हैं। मैं ‘herbi-fruity-vore’ हूँ। अर्थात् अनाज खाते हुए फलाहार भी भखने वाला।

अपना एक मित्र है। जब बनारस में रहता था तो उसके यहाँ नवरात्र पे ढेर सारा स्वादिष्ट फलाहार बनता था। हम अपने घर में अनाजी खा के उसके यहाँ फलाहार खाने जाते थे। भूखा रहना अपने बस की बात नहीं। वर्ष में केवल दो दिन व्रत रहता हूँ: महाशिवरात्रि और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी।

बन्धुओं प्रतिदिन किसी एक ग्रन्थ का पाठ अवश्य करें। संस्कृत ही संस्कृति का मूल है अतः अर्थ समझते हुए स्वाध्याय करें। मेरे परिवार में नित्य चार ग्रन्थों का पाठ होता है। मैं रुद्री करता हूँ, पिताजी गीता और मानस, माँ दुर्गा सप्तशती का पाठ करती हैं। यह बताने का आशय यह है कि आपके कुटुंब में जितने सदस्य हों उतने ग्रन्थ आपस में बाँट लीजिए। शास्त्रों से विमुख होना संस्कृति से विमुख होना है। संस्कृति से विमुख होना अर्थात् राष्ट्र से विमुख होना है।

बिना पूजा पाठ किये झुट्ठै व्रत रखना व्यर्थ है। कहा गया है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए उच्चारण की अशुद्धि नहीं होनी चाहिये। जिन्हें संस्कृत नहीं आती वे हिंदी संस्करण का मानसिक पाठ करें।

एक बार करपात्री जी महराज हाथ में कोई ग्रन्थ लेकर पाठ कर रहे थे। किसी ने देखा तो टोक दिया कि महराज पोथी को हमेशा लकड़ी के पीढ़े पर रख कर पाठ करना चाहिये अन्यथा आधा फल ही प्राप्त होता है।

करपात्री जी बोले, ‘कलियुग में पूरा फल मिलता कहाँ है, आधा ही मिल जाये तो बहुत है।’ अतः यदि आप संस्कृत से परिचित नहीं हैं तब भी हिंदी में दुर्गा सप्तशती गीता प्रेस से ले आइये। देवी का स्मरण करते हुए पाठ करें। एक बार पूरी कथा पढ़ लेंगे फिर संस्कृत में पढ़ने पर स्वतः सरल प्रतीत होगा।

आप सभी को नववर्ष एवं नवरात्र मंगलमय हो। धर्मो रक्षति रक्षितः। जय जय श्री राम _/\_