loading...

Click करके- जानिए हमारे 5 वीर स्वतंत्रता सेनानी जो सेनानी के साथ थे एक महान कवि

loading...

स्वतंत्रता प्रप्ति के पहले जबकि भारत गुलामी की दास्ताँ की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था तब लोगो से सीधे तौर पर जुड़ने के साधन सीमित हुआ करते थे l हमारे क्रांतिकारी साहसी तो थे ही किन्तु लोगो को जागरूक करना भी अत्यंत जरुरी था और लोग भी क्रांतिकारियों के विचार और उनके भाषण सुनने को आतुर रहते थे l ऐसे में कलम ने तलवार का काम किया l उस समय कुछ क्रांतिकारी जैसे अपनी तलवार से चोट करते थे उसी भांति उनकी कविता या रचना भी काम करती थी l आप इस बात का स्वयं आंकलन कर सकते है कि जिनका साहस और कार्य इतना प्रशंसनीय और उच्च स्तरीय हो उनकी कविता किस तरह ही रही होगी l

आज हम चर्चा करते है उन क्रांतिकारियों के बारे में जिनकी कविता भी क्रान्ति उगलती थी

1- शहीद भगत सिंह

भगत सिंह के नाम से शायद ही कोई होगा जो परिचित न हो l भगत सिंह न जाने कितने युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं l आज भी जो लोग राष्ट्रहित में सेवा करना चाहते हैं, इन्हीं को अपना रोल मॉडल मानते हैं l इनकी कविताए जेल के दीवारों से सीधे हमारे दिल तक पहुची थीं l

जेल में भगत सिंह ने करीब २ साल गुजारे । इस दौरान वे कई क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े रहे । उनका अध्ययन भी जारी रहा । उनके उस दौरान लिखे ख़त आज भी उनके विचारों का दर्पण हैं । इस दौरान उन्होंने कई तरह से पूंजीपतियों को अपना शत्रु बताया है । उन्होंने लिखा कि मजदूरों के उपर शोषण करने वाला एक भारतीय ही क्यों न हो वह उसका शत्रु है । उन्होंने जेल में अंग्रेज़ी में एक लेख भी लिखा जिसका शीर्षक था मैं नास्तिक क्यों हूँ। जेल मे भगत सिंह और बाकि साथियो ने ६४ दिनो तक भूख हड़ताल कीl

भगत सिंह को हिंदी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी जो कि उन्होंने बटुकेश्वर दत्त से सीखी थी । उनका विश्वास था कि उनकी शहादत से भारतीय जनता और उद्विग्न हो जाएगी और ऐसा उनके जिंदा रहने से शायद ही हो पाए । इसी कारण उन्होंने सजा सुनाने के बाद भी माफ़ीनामा लिखने से मना कर दिया । उन्होंने अंग्रेजी सरकार को एक पत्र लिखा जिसमें कहा गया था कि उन्हें अंग्रेज़ी सरकार के ख़िलाफ़ भारतीयों के युद्ध का युद्धबंदी समझा जाए तथा फ़ासी देने के बदले गोली से उड़ा दिया जाए ।

फ़ासी के पहले ३ मार्च को अपने भाई कुलतार को लिखे पत्र में उन्होंने लिखा था –

उसे यह फ़िक्र है हरदम तर्ज़-ए-ज़फ़ा (अन्याय) क्या है

हमें यह शौक है देखें सितम की इंतहा क्या है

दहर (दुनिया) से क्यों ख़फ़ा रहें, चर्ख (आसमान) से क्यों ग़िला करें

सारा जहां अदु (दुश्मन) सही, आओ मुक़ाबला करें ।

आगे- राम प्रसाद बिस्मिल

1 of 5
CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...