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गुरुकुल के इन पुराने मॉडल पर पढ़ाई करने वाले बच्चों के सामने आधुनिक शिक्षा ने टेके घुटने

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अहमदाबाद (कर्णावती): दिन प्रतिदिन गिरती जा रही भारतीय व्यवस्था पर चिंता करने वाले बहुतों बुद्धिजीवी मिलेंगे लेकिन भारतीय शिक्षा व्यवस्था कैसी हो, उसका स्वरूप कैसा हो, किस प्रकार उसे विकसित किया जाए ऐसे हर प्रश्नों का जवाब है : गुजरात का यह गुरुकुल, जो आज इक्कीसवीं सदी में भी पूर्णतया भारतीय परंपराओं पर आधारित शिक्षा देता है। अपनी अनूठी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से आज यह दुनिया के बड़े बड़े संस्थानों को टक्कर दे रहा है।

इस गुरुकुल का पूरा नाम हेमचंद्राचार्य संस्कृत पाठशाला है, जो स्थित है गुजरात के कर्णावती (अहमदाबाद) शहर स्थित साबरमती में, जिसे देखने देश व दुनिया भर के कोने कोने से लोग आते है और अपने बच्चों का यहाँ प्रवेश दिलवाने को लालायित रहते हैं।

अमेरिका के हॉवर्ड विश्वविधालय से लेकर भारत के आई आई टी में क्या कोई ऐसी शिक्षा दी जाती है कि छात्र की आंख पर पट्टी बांध दी जाये और उसे प्रकाश की किरने भी दिखाई ना दे, फिर भी वो सामने रखी हर वस्तु को पढ़ सकता हो? है ना चौकाने वाली बात? पर इसी भारत में किसी हिमालय की कंदरा में नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के गृहराज्य गुजरात के महानगर में यह चमत्कार आज साक्षात् हो रहा है।

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