गुजरात का ये गुरुकुल टक्कर देता है अमेरिका की हॉवर्ड से लेकर भारत की आईआईटी तक को

गुरुकुल के इन पुराने मॉडल पर पढ़ाई करने वाले बच्चों के सामने आधुनिक शिक्षा ने टेके घुटने

दूसरा उदहारण उस बच्चे का है जिसे दुनिए के इतिहास की कोई भी तारीख पूछो, तो वह सवाल ख़त्म होने से पहले उस तारीख को क्या दिन था, ये बता देता है। इतनी जल्दी तो कोई आधुनिक कंप्यूटर भी जवाब नहीं दे पाता । तीसरा बच्चा गणित के 50 मुश्किल सवाल मात्र अढाई मिनट में हल कर देता है। यह विश्व रिकॉर्ड है । यह सब बच्चे संस्कृत में वार्ता करते है, शास्त्रों का अध्यन करते है, देशी गाय का दूध-घी खाते है । बाजारू सामान से बचकर रहते है । यथासंभव प्राकृतिक जीवन जीते है और घुड़सवारी, ज्योतिष, शास्त्रीय संगीत, चित्रकला आदि विषयों का इन्हें अध्यन कराया जाता है । इस गुरुकुल में मात्र 100 बच्चे है पर उनको पढ़ाने के लिये 300 शिक्षक है । ये सब वैदिक पद्धति से पढ़ाते है । बच्चो की अभिरूचि अनुसार उनका पाठयक्रम तैयार किया जाता है । परीक्षा की कई निर्धारित पद्दति नहीं है ।

पढ़कर निकलने के बाद डिग्री भी नहीं मिलती यहाँ पढने वाले ज्यादातर बच्चे 15-16 साल से काम आयु के है और लगभग सभी बच्चे अत्यंत संपन्न परिवारों से है इसलिये इन्हें नौकरी की भी चिंता नहीं है । वैसे भी डिग्री वालो को भी नौकरी कहाँ मिल रही है?