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अहमदाबाद: गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लाभ हुआ है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सभी छह नगर निगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। भाजपा ने वड़ोदरा, सूरत, राजकोट, भावनगर, जामनगर और अहमदाबाद नगर निगमों में जीत हासिल कर ली है, जहां 22 और 29 नवम्बर को चुनाव कराए गए थे, हालांकि राजकोट नगर निगम में भाजपा केवल एक सीट से आगे रही।

31 जिला पंचायतों वाले अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस ने 21 और भाजपा ने 10 स्थानों पर जीत दर्ज की है। सन 2010 में भाजपा ने 30 जिला पंचायतों पर कब्जा जमाया था, जबकि कांग्रेस को केवल एक सीट ही मिली थी। पिछले वर्ष गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात की सत्ता आंनदीबेन पटेल के हाथ में आने के बाद यह सत्ता परीक्षण का पहला मौका है। मोदी के गुजरात छोड़ने के बाद इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा था और इसे गुजरात विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहा जा रहा था। नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर पटेल समुदाय के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर भी यह राज्य में पहला चुनाव था।

इससे पहले गुजरात निकाय चुनावों के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस जिला और तालुका पंचायतों में बढ़त बनाये नज़र आ रही थी, वहीं भाजपा नगर निगमों और नगरपालिकाओं में आगे चल रही थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य में पहले भाजपा का लगभग सभी स्थानीय निकायों पर कब्जा था। पटेल आरक्षण आंदोलन की पृष्ठभूमि में और मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के लिए पहले बड़े राजनीतिक मुकाबले के चलते निकाय चुनावों को सत्तारूढ़ पार्टी के लिहाज से महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। प्रदेशभर से आ रहे शुरूआती रझानों के अनुसार राज्य की नौ जिला पंचायतों में कांग्रेस आगे थी, वहीं कुल 31 जिला पंचायतों में से चार में भाजपा बढ़त बना रही थी। पिछले चुनाव में कांग्रेस को केवल तापी जिला पंचायत पर जीत हासिल हुई थी।

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