जानिए, क्‍या ग्रीन टी के सेवन से कैंसर का खतरा कम होता है….

ग्रीन टी से कैंसर से भी बचा जा सकता है।

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कैंसर सेल्स की उन्नति को रोकें
वैज्ञानिकों ने यह भी माना है कि हरी चाय में दो महत्वपूर्ण एण्टीआक्सिडेंट एपीगैलोकाटैकिनगैलेट इजीसीजी और एपीगैलोकाटैकिन इजीसी पाये जाते हैं। ये ट्यूमर सेल्स में पाये जाने वाले प्रोटीन से जुड़ जाते हैं और कैंसर सेल्स की उन्नति को रोकते हैं और फिर दूसरे प्रकार के कैंसर जैसे लंग, लीवर, स्किन, पैंक्रियाज और ब्रेस्ट के सेल्स तक नहीं पहुंच पाते।

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रोगों से लड़ने की बढ़ती है शक्ति
एण्टीआक्सीडेंट की मात्रा एण्टी कैंसर प्रभाव के लिए जरूरी होती है वो हमारे शरीर को 2 से 3 कप चाय में मिल जाती है। हरी चाय में पाये जाने वाला दूसरा घटक हैं, कैफीन जिसका कि ट्यूमर सेल्स की उन्नति पर कोई प्रभाव नहीं होता। हरी चाय रोगों से लड़ने का ना सिर्फ एक अच्छा प्रतिरोधक उपाय है बल्कि इसमें सम्भावित रोगों से लड़ने की शक्ति भी है।

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ट्यूमर सेल्स को बढ़ने से रोकें
एण्टीआक्सिडेंट इसीजीसी ट्यूमर से बचाव करने के साथ साथ ट्यूमर के सेल्स को बढ़ने से भी रोकते हैं। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इजीसीजी ट्यूमर के केमिकल डाइहायड्रोफोलेट रिडक्टेज़ डी एच एफ आर को बांध देता हैं जो कि ट्यूमर सेल्स को बढ़ावा देता है और फिर ट्यूमर के सेल्स बढ़ नहीं पाते हैं। लेकिन हरी चाय की एक खामी यह है कि यह विटामिन बी 9 फॉलिक एसिड के लेवल को शरीर में कम करता है लेकिन इस कमी को दूसरे फालिक एसिड के उत्पादों को लेकर पूरा किया जा सकता है जैसे चिकन, बीन्स और हरी सब्जियां।

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एक प्राकृतिक उपज होने की वजह से हरी चाय शरीर के बिना किसी स्वस्थ टिश्यू को प्रभावित किये कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकती है। पारम्परिक कैंसर की चिकित्सा के लिए प्रयुक्त रेडियेशन और कीमोथेरेपी स्वस्थ सेल्स और कैंसरस सेल्स में फर्क नहीं कर पाती हैं इसलिए हरी चाय एक ईश्वरीय देन है।

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