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धोरों की धरती बाड़मेर में माटी के झरने जितने आकर्षक रहे हैं, उतना ही रहस्यमयी है यहां के सेतराऊ गांव का एक धोरा, जिसकी रेत टकराते ही वाद्य यंत्र जैसी आवाज करती है। यह करिश्मा क्यों है, इस विषय पर भूगोल और भू-गर्भ के विशेषज्ञों की भी समझ जवाब दे जाती है, लेकिन वे मानते हैं कि इस धोरे का फार्मेशन (निर्माण) एेसा है कि रेत आवाज कर सकती है।

सेतराऊ गांव के तीन तरफ पहाडि़यां हैं। इसके बीच में कमांडेंट कल्याणसिंह के खेत में यह धोरा है, जो उनके पथरीली जमीन पर बने पैतृक मकान के ठीक पीछे है। इस धोरे का आकर्षण इसकी रेत का संगीत। इस धोरे की रेत को जैसे ही आपस में टकराते हैं या इस पर दौड़ते हैं तो भपंग जैसी आवाज निकलने लगती है। एेसे लगता है जैसे ’रेत कुछ कहना’ चाहती है। गांव के लोग जमाने से आवाज को सुन रहे हैं।

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