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नई दिल्ली :- कश्मीर में जारी हिंसा के दौर से निपटने की जिम्मेदारी पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को सौंपी थी। अजीत डोभाल के जिम्मेदारी संभालते ही असर दिखने लगा है। घाटी में अलगाववादियों और आतंकियों पर लगाम लगाने के लिए अब BSF को भेजा जा रहा है। घाटी में लगभग 12 साल बाद बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स की तैनाती काफी कुछ कह रही है।

कश्मीर में बीएसएफ के लगाभग 2600 जवानों को तैनात किया गया है। इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी सूबे के दौरे पर जाएंगे। उनके साथ गृहमंत्रालय के अधिकारी भी साथ में होंगे। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से जारी हिंसा में अब तक करीब 70 लोग मारे जा चुके हैं। सोमवार विपक्षी नेताओं के साथ बैठक में पीएम मोदी ने कहा था कि घाटी में संविधान के दायरे में रहकर सारे कदम उठाए जाएंगे।

कश्मीर में स्थिति को काबू में करने के लिए अजीत डोभाल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। घाटी में बीएसएफ की तैनाती से भारत एक तीर से कई निशाने साध रहा है। पहले तो घाटी में अलगाववादियों के तेवर ठंडे हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ लगातार जारी कर्फ्यू के कारण आतंकी गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं। तीसरा भारत को ये जताने का मौका मिल रहा है कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां के हालात को काबू में करने के लिए उसे जो भी करना होगा वो करेगा।

घाटी में 12 साल बाद बीएसएफ की तैनाती काफई अहम है। साल 2004 में बीएसएफ को वहां से हटा लिया गया था। बीएसएफ की जगह सीआरपीएफ की तैनाती की गई थी. शहर के पुलिस अधिकारियों की माने तो बीएसएफ के आने से काफी फायदा होगा। घाटी के वाणिज्यिक केंद्र लाल चौक के आस पास के इलाकों में बीएसएफ को तैनात किया गया है। साफ है कि मोदी सरकार घाटी में हालात को काबू में करने के लिए अब खुलकर सामने आ रही है। अजीत डोभाल कुछ ऐसा इंतजाम करना चाहते हैं कि घाटी में पाकिस्तान के भाड़े के टट्टू पत्थर उठाने से भी डरें।

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