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अफगानिस्तान में घुसकर इस गोरखा ने अकेले ढेर कर दिए 30 तालिबानी आतंकी

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नई दिल्ली : यह कहना कि गोरखा नेपाल के सोल्जर मात्र हैं, उन्हें कमतर आंकना है। नेपाल में हमला करने की हिम्मत आज भी अगर कोई नहीं कर पाता तो उसकी एकमात्र वजह है, नेपाल के इन गोरखाओं की छवि। वे सभ्य और निडर शूरवीर हैं, जो केवल नेपाली आर्मी को ही अपनी सेवाएं नहीं देते बल्कि ब्रिटिश और भारतीय सेना के लिए भी मरने को सदैव तत्पर रहते हैं। आज नहीं, 1816 के एंग्लो-नेपालीज युद्ध के अंत के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। दुर्गम परिस्थितियों और टेढ़़े-मेढे़ रास्तों पर भी वे अपने असाधारण बहादुरी, क्षमता और नायकत्व का प्रदर्शन बखूबी कर दिखाते हैं। अपनी इसी परंपरा पर विश्वास करने वाले अफगानिस्तान में तैनात एक गोरखा दीपप्रसाद पुन ने अकेले ही एक पोस्ट पर 30 तालिबानी लड़ाकुओं को मुंह की खिला दी।

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