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भारत : बिहार चुनाव ही ले लीजिए! गाय छाई रहीं। नेताओं ने भाषणों में धर्म ग्रंथों से उठाए गोधन, कामधेनु, गोवर्धन, गोरक्षा, जननी जैसे शब्द बोल-बोलकर गायों को बूचड़खानों में जाने से रोकने के संकल्प लिए। कैसे रोकेंगे? ये कोई नहीं बता पाया।h2

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अलग-अलग संस्थाओं के मुताबिक, पंजाब-हरियाणा में एक लाख से ज्यादा लावारिस पशु हैं। इन्हें पालेगा कौन? दूध न देने वाली देसी गायों को कोई पाल भी ले तो क्या सिर्फ धर्म के नाम पर? ऐसा मुमकिन नहीं दिखता। लेकिन लाडवा (हरियाणा में एक जगह) के इन लोगों ने इसे विशुद्ध व्यापार के नजरिए से देखा और एक ऐसी मिसाल पेश की, जो सही मायनों में लावारिस देसी गायों को बचाने की सार्थक पहल हो सकती है।

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